हनुमानगढ़। प्रदेश कार्यकारिणी के आह्वान पर अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ जिला शाखा की ओर से सरकार की कथित कर्मचारी विरोधी नीतियों के विरोध में तथा महासंघ की सात सूत्री मांगों को पूर्ण करवाने की मांग को लेकर सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन किया गया। यह यज्ञ जिला कलक्ट्रेट परिसर में स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष सरकार की बुद्धि को सही दिशा में मोड़ने और कर्मचारी हित में निर्णय लेने की कामना के साथ किया गया।

महासंघ के जिलाध्यक्ष चन्द्रभान ज्याणी ने कहा कि राज्य सरकार लगातार कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी कर रही है। इसके विरोध में प्रदेश कार्यकारिणी के निर्देश पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन किया गया है, ताकि सरकार, विशेषकर मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री, कर्मचारियों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करें।

जिला मंत्री रामनिवास ने महासंघ की सात प्रमुख मांगों की जानकारी देते हुए बताया कि इनमें डीपीसी नियमित रूप से आयोजित कर समयबद्ध पदोन्नति देना, वेतन विसंगतियों का निराकरण करना, ओपीएस से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करना, विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े लाखों पदों पर स्थायी भर्ती करना, संविदा व अल्प वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करना, निष्पक्ष व पारदर्शी स्थानांतरण नीति बनाना, तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण करना, अल्प वेतन भोगी कर्मचारियों का न्यूनतम मानदेय 26 हजार रुपए निर्धारित करना तथा सार्वजनिक संसाधनों के निजीकरण को बंद करना शामिल है।


उन्होंने बीकानेर क्षेत्र में सोलर प्लांट के लिए खेजड़ी के पेड़ों को काटने की अनुमति का भी विरोध करते हुए कहा कि महासंघ न केवल कर्मचारी हितों की रक्षा चाहता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी अत्यंत आवश्यक मानता है। सरकार से मांग की गई कि कर्मचारियों की मांगों का समाधान करने के साथ-साथ वृक्षों की भी रक्षा की जाए। महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि 11 फरवरी को प्रस्तुत होने वाले बजट सत्र में कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 12 फरवरी को कर्मचारी बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर हड़ताल करेंगे।
