
हनुमानगढ़। नव सृजन को प्रोत्साहित करने व प्रतिभाओं को आगे लाने के उद्देश्य से चली रही कागद फाउंडेशन व मरुधरा साहित्य परिषद की मासिक साहित्य गोष्ठी का कागद पुस्तकालय में आयोजन किया गया। अध्यक्षता अशोक खत्री ने की। मुख्य अतिथि गिरिराज शर्मा थे। गोष्ठी की शुरुआत युवा कवि जयसूर्या ने हनुमानगढ़ पर कविता पाठ से की। ‘भटनेर इतिहास कहता है, घग्घर का पानी कहां चुप रहता है’। शायर सुरेंद्र सत्यम ने राजस्थानी व्यंग्य पाठ किया। मंहगाई को टेम हो मंदी में तंगी झेल रहया है, जनता घेराव कर राखियो हो बेगा राम जी ताश खेल रहिया है।’ युवा कवि उदयपाल प्रजापति ने कविता ‘कभी तन्हाइयों में तुम सफर यादों का देखना’ सुनाई। वरिष्ठ साहित्यकार नरेश मेहन ने प्रकृति व पुरानी यादों को खूबसूरती से प्रस्तुत किया। चिठ्ठियां कहां चली गई, प’से पहाड़ रहने दो मुझे और ‘घर में हो अगर बूढ़े मां बाप, हो दादा-दादी तो उनके चेहरों में छुपी एक-आधी कहानी पढ़ आना’ सुनाई। अध्यापक रामेश्वर बिश्नोई ने पेड़ों को बचाने के लिए कहानी का वाचन किया। अध्यापिका करुणा शर्मा व योगेश अरोड़ा मौजूद रहे। मुख्य अतिथि गिरिराज शर्मा ने ‘मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे की हर दीवार ये बोली, मत बन शैतान अरे इंसान, खेल मत खून की होली’ सुनाकर एकजुटता की बात कही। अध्यक्षता कर रहे अशोक खत्री ने भावपूर्ण कविता का पाठ किया। ‘उनके लाखों डूब गए, मेरे तो पचासों डूबे हैं’ सुनाकर भ्रष्टाचार पर व्यंग्य किया। अंत में कागद फाउंडेशन के सचिव नरेश मेहन ने सभी रचनाकारों का आभार व्यक्त किया।
