हनुमानगढ़। जिले की सभी शिक्षण संस्थाओं (स्कूल/कॉलेज) में अध्ययनरत विद्यार्थियों को अब प्राथमिक उपचार की शिक्षा दी जाएगी। इससे न केवल विद्यार्थियों में हैल्थ केयर स्किल विकसित होगी, बल्कि आपात स्थिति में वे किसी की जान बचाने में भी उपयोगी साबित होंगे। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत शर्मा के निर्देशन में आज राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में प्रात: 11 से 3 बजे तक जिले के समस्त चिकित्सकों एवं नर्सिंगकर्मियों को बुनियादी चिकित्सा कौशल, कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर), फस्र्ट ऐड आदि का प्रशिक्षण दिया गया। इसके उपरांत चिकित्सक 11 से 31 जनवरी तक अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित शिक्षण संस्थाओं में जाकर वहां अध्ययनरत बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य शिक्षा की जानकारी देंगे ताकि आपात स्थिति या हादसों में बच्चों द्वारा आमजन की जान बचाई जा सके। प्रशिक्षण में मेडिकल कॉलेज की प्रिंसीपल डॉ. कीर्ति शेखावत द्वारा प्रशिक्षण की एक दिवसीय टीओटी कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. सुमन डूडी, दिलीप कोचर एवं एमबीबीएस मेडिकल स्टूडेंट द्वारा प्रशिक्षण दिया गया।

डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अखिलेश कुमार शर्मा ने बताया कि आपात स्थिति में आमजन को बुनियादी चिकित्सा कौशल की जानकारी देना एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे आपातकालीन स्थिति में लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसी के चलते अब चिकित्सा विभाग के डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा जिले के समस्त विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में बच्चों को सीपीआर, चिकित्सा शिक्षा एवं फस्र्ट ऐड की शिक्षा दी जाएगी। इसी के तहत हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित मेडिकल कालेज में शनिवार प्रात: 11 बजे जिले के समस्त डॉक्टर्स एवं चिकित्साकर्मियों को बुनियादी चिकित्सा कौशल, कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर), फस्र्ट ऐड आदि का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में उपस्थित सभी चिकित्सकों को सीपीआर, बाढ़, शीतलहर से प्रभावित, हीटवेव से प्रभावित, पानी में डूबे व्यक्ति का उपचार, इलैक्ट्रिक शॉक के दौरान दिए जाने वाले उपचार, भूकम्प, सर्पदंश, हृदय रोग से बचाव की जानकारी देकर जागरुक किया। साथ ही बाढ़ व आगजनी से बचाव, घायलों का प्राथमिक उपचार, घायल व्यक्ति की ब्लीडिंग रोकना, चोटों को स्टेबलाइज करना और पीडि़त की जान बचाने के लिए सीपीआर देने समेत अन्य का डेमो भी दिया।

क्या है सीपीआर
डॉ. अखिलेश शर्मा ने बताया कि डूबने की स्थिति, हार्ट अटैक अथवा किसी अन्य कारण से यदि धड़कन रूक जाती है, तो भी हृदय आधे से पौने घंटे तक जीवित अवस्था में रहता है। सीपीआर प्रक्रिया में एक खास शैली में दोनों हाथों से पीडि़त के सीने पर बार-बार दबाव डालना होता है। साथ ही पीडि़त का मुंह खोलकर अपने मुंह से सांस देनी होती है। इसके अलावा जब तक मेडिकल टीम ना आ जाए या मरीज होश में न आ जाए, तब तक सीपीआर के जरिए मरीज को बचाने की उम्मीदें बनाए रख सकते हैं। यह भी ध्यान रखें कि सतह ऊंची-नीचे ना हो। मरीज के सीने को हथेलियों से तीन से चार सेंटीमीटर तक बार-बार दबानरा होता है।
सीपीआर प्रशिक्षण के लाभ
– सीपीआर तकनीक सिखाने से आपातकालीन स्थिति में लोगों की जान बचाई जा सकती है।
– आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सीपीआर को शामिल करने से लोगों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
– सीपीआर प्रशिक्षण से लोगों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे आपातकालीन स्थिति में बेहतर ढंग से प्रतिक्रिया कर सकते हैं।
