
हनुमानगढ़। टाउन स्थित नेहरू मैमोरियल विधि महाविद्यालय में बुधवार को कली बनाम देव के बीच अन्तर्गत धारा 5 एवं 9 हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 के अन्तर्गत मूटकोर्ट का मंचन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीताराम ने की। अर्जीदार पक्ष की तरफ से विधि प्रथम सेमेस्टर की छात्रा सुनीता की ओर से धारा 11 के अन्तर्गत दूसरे पक्षकार कली के विवाह को शून्य घोषित करने के लिए न्यायालय के समक्ष याचिका दायर की गई। जबकि द्वितीय पक्षकार कली की ओर से धारा 9 हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 के अन्तर्गत दाम्पत्य सम्बन्धों की पुनर्स्थापना के लिए याचिका दायर की गई। वादी की तरफ से अधिवक्ता की भूमिका छात्र तरुण कुमार एवं प्रतिवादी की तरफ से अधिवक्ता की भूमिका छात्र प्रदीप कुमार ने निभाई। विधि छात्र सुनीता, निशान्त एवं परीक्षित बिश्नाई ने गवाह की भूमिका निभाई। राजवन्ती की ओर से टाइपिस्ट, सुरेन्द्र की ओर से मुंशी की भूमिका निभाई गई। हौकर की भूमिका सौरभ शर्मा ने निभाई। पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश छात्र अब्दुल रज्जाक ने दोनों पक्षों को सुना तथा अधिवक्ताओं की ओर से की गई जिरह एवं गवाहों के बयानों के आधार पर वादी अनीता के पक्ष में निर्णय दिया। प्रतिवादी देव को आदेश दिया गया कि जब तक कली पुनर्विवाह नहीं कर ले तब तक प्रतिमाह 10 हजार रुपए भरण-पोषण के रूप में प्रदान किए जाएं। प्राचार्य डॉ. सीताराम ने कहा कि मूटकोर्ट के माध्यम से छात्र-छात्राओं की न्यायालय के समक्ष आने वाली कानूनी शब्दावली की कठिनाइयां एवं झिझक दूर होती हैं। इसके जरिए छात्र-छात्राओं को कानून के तकनीकी पहलुओं से रूबरू कराया जाता है। इस मौके पर मूटकोर्ट प्रभारी सह आचार्य डॉ. केबी ओझा एवं डॉ. बृजेश अग्रवाल, डॉ. मोहम्मद इमरान सहित शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
