हनुमानगढ़। कार्यालय में बंधक बनाकर मारपीट करने, मोबाइल फोन, सोने की चेन, नकदी छीनने व जान से मारने की धमकी देकर एक लाख रुपयों की मांग करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में पेशे से ड्राइवर उत्तरप्रदेश के व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत कर कानूनी कार्यवाही की मांग की थी लेकिन तीन दिन बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। रविन्द्र (42) पुत्र पवन सिंह निवासी मोहल्ला मुशीपुरा, कस्बा नकुड़ जिला सहारनपुर, उत्तरप्रदेश ने मीडिया को बताया कि वह श्री गणेश सेवा सेवा संस्थान ट्रस्ट सहारनपुर में ड्राइवर का कार्य करता है।

14 जनवरी को सुरेन्द्र मारवाल ने विजय कुमार उर्फ विक्की को फोन कर संस्था में चन्दा देने के लिए बुलाया था। वह, विजय कुमार उर्फ विक्की व नरेश के साथ 14 जनवरी को सुबह करीब 11 बजे कोहला पेट्रोल पम्प व नहर के पास सुरेन्द्र मारवाल के ऑफिस गए। वहां पर सुरेन्द्र मारवाल व 15-20 अन्य व्यक्ति पहले से ही मौजूद थे। यह लोग उससे व उसके साथियों के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट करने लगे।

सुरेन्द्र मारवाल ने उससे गाड़ी की चाबी, मोबाइल फोन, गले में पहनी सोने की चेन छीन ली। जेब में रखे पर्स में से सात हजार रुपए निकाल लिए। सुरेन्द्र मारवाल व अन्य लोगों ने विजय कुमार व नरेश के साथ भी मारपीट कर उनसे मोबाइल फोन व उनके जेब से पर्स व अन्य कागजात छीन लिए। इन लोगों ने उसे, विजय कुमार व नरेश को शाम पांच बजे तक जबरदस्ती बंधक बनाकर अपने ऑफिस में बैठाए रखा।

सुरेन्द्र मारवाल व अन्य लोगों ने उसे जातिसूचक गालियां देकर उसके साथ दुव्यर्वहार किया। सुरेन्द्र मारवाल ने उससे 1 लाख रुपए की मांग की और कहा कि 1 लाख रुपए नहीं दिए तो झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवा देंगे। सुरेन्द्र मारवाल ने उसे डरा-धमकाकर उसके फोन से उसकी पत्नी को फोन किया और कहा कि वह हनुमानगढ़ टाउन पुलिस थाना से थानेदार बोल रहा है। तुम्हारा पति गलत काम करते हुए पकड़ा गया है। अगर इसे बचाना है 1 लाख रुपए भेज दो। उसके बाद उसकी पत्नी ने सुरेन्द्र मारवाल की ओर से भेजे गए स्कैनर के जरिए 20 हजार रुपए जय श्रीराम नामक व्यक्ति के बैंक खाते में भेजे। तभी मौके पर शिशपाल पुत्र जगदीश प्रसाद आ गया। शिशपाल ने बड़ी मुश्किल से उन्हें इनके चंगुल से छुड़वाया। सुरेन्द्र मारवाल वगैरा ने उसे धमकी दी कि अगर आज के बाद हनुमानगढ़ में दिखा तो जान से मार देंगे। उसने इस संबंध में टाउन पुलिस थाना व पुलिस अधीक्षक को शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। रविन्द्र ने इस संबंध में मुकदमा दर्ज करवा कानूनी कार्यवाही की मांग पुलिस प्रशासन से की।

आरोपों को नकारा
उधर, जय श्रीराम के अनुसार उसके पास तीन व्यक्ति आए थे। तीनों ही आदमी फ्रॉड थे। इनमें से एक जना वहां से चला गया। शेष दो जनों में से एक ने खुद को जांगिड़ बताया जबकि वह मेघवाल समाज से था। एक जने ने खुद को नरेश निरानिया बताया। बाद में नरेश ने बताया कि वह धोबी है। उसे दोनों जने यहां पर दिहाड़ी पर लेकर आए हैं। सुरेन्द्र मारवाल के अनुसार उन्होंने इन लोगों के साथ मारपीट और छीनाझपटी नहीं की। उन्होंने तो उन्हें कहा था कि वे फ्रॉड कर प्राप्त किए गए रुपए वापस कर दें, वे समाज को वापस कर देते हैं। लेकिन यह लोग सिर्फ बीस हजार रुपए ही मंगवा पाए।
