हनुमानगढ़। वसंत पंचमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को जय मां सरस्वती संगीत समिति की ओर से जंक्शन स्थित श्री बाबा रामदेव धाम में कीर्तन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भक्तिमय वातावरण में गूंजते सुरों और तालों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से सराबोर कर दिया। समिति के कलाकारों ने मां सरस्वती की वंदना और भावपूर्ण कीर्तनों के माध्यम से धर्म, संस्कृति और संगीत की त्रिवेणी प्रवाहित की। समिति के जिलाध्यक्ष पवन कुमार ने बताया कि यह आयोजन हर वर्ष वसंत पंचमी पर इसलिए किया जाता है, ताकि सनातन संस्कृति का संवर्धन हो और संगीत के माध्यम से समाज को सकारात्मक ऊर्जा मिले।

उन्होंने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि साधना है। ऐसी साधना जो मनुष्य को परमात्मा से जोड़ती है। कलाकारों के लिए मां सरस्वती देवी स्वरूपा हैं और उनकी आराधना सुर-साधना से ही पूर्ण होती है। उन्होंने वर्तमान दौर को एआई का युग बताते हुए युवाओं से संगीत से जुड़ने का आह्वान किया। नरेश कुमार के अनुसार संगीत में वह जीवंत शक्ति है, जो किसी भी कृत्रिम तकनीक में संभव नहीं।

यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन मिले, तो वे संगीत के क्षेत्र में देश-प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अनेक कलाकार संगीत के सहारे अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं, इसलिए सरकार को कलाकारों के कल्याण के लिए ठोस योजनाएं बनानी चाहिए। साथ ही धर्मशाला एवं मां सरस्वती मंदिर के लिए भूमि आवंटन की मांग भी रखी गई, जिससे नियमित सांस्कृतिक आयोजन संभव हो सकें। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कलाकार पवन पंछी ने कहा कि कलाकार हर अवसर पर समाज में खुशियां बांटते हैं, परंतु संकट के समय उन्हें विशेष सहयोग की आवश्यकता होती है। उन्होंने कोरोना काल में सरकार की ओर से कलाकारों को दी गई सहायता के लिए आभार जताते हुए मांग की कि भविष्य में भी कलाकारों, नुक्कड़ प्रस्तुतियां देने वालों और वाद्य यंत्र बजाने वाले संगीतकर्मियों के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। कीर्तन के दौरान वातावरण जय मां सरस्वती के जयघोष और मधुर संगीत से गुंजायमान रहा। आयोजन ने यह संदेश दिया कि संगीत न केवल आत्मा की भाषा है, बल्कि समाज को जोड़ने वाली सबसे सशक्त कड़ी भी है।
