रावतसर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा प्रस्तावित नए ड्राफ्ट रेगुलेशन को लेकर रावतसर में आमजन, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों में रोष देखने को मिला। इस संबंध में राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन उपखंड अधिकारी संजय अग्रवाल को सौंपा गया। ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि यूजीसी के प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशन उच्च शिक्षा व्यवस्था में असमानता और भेदभाव को बढ़ावा देने वाले हैं। उनका कहना था कि वर्तमान स्वरूप में ये नियम एकपक्षीय प्रतीत होते हैं, जिससे विशेष रूप से सामान्य (सवर्ण) वर्ग के छात्रों के शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि वे किसी भी वर्ग के अधिकारों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए जो सभी वर्गों को समान अवसर दे। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रस्तावित नियमों की भावना से ऐसा प्रतीत होता है मानो सामान्य वर्ग के छात्रों को नकारात्मक दृष्टि से देखा जा रहा हो, जो संविधान की समानता और सामाजिक न्याय की भावना के अनुरूप नहीं है।

ज्ञापनकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि नीतियां संतुलनहीन और एकपक्षीय होंगी तो इससे समाज में विभाजन, अविश्वास और तनाव बढ़ सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के नियमों से एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों को भी अनचाहे रूप से टकराव की स्थिति में धकेला जा सकता है, जबकि आवश्यकता आपसी समन्वय और सहयोग की है। ज्ञापन में मांग की गई कि यूजीसी के प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशन को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और सभी वर्गों- सवर्ण, एससी, एसटी एवं ओबीसी- के छात्रों के लिए समान अवसर, मेरिट और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।

साथ ही नीति निर्धारण समितियों में सभी सामाजिक वर्गों का संतुलित और पारदर्शी प्रतिनिधित्व तथा छात्रों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और राज्य सरकारों से व्यापक संवाद के बाद ही किसी नई नीति को लागू करने की मांग रखी गई। इसके अतिरिक्त ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) को स्वायत्तशासी संस्थाओं एवं पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण देने की मांग भी ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल रही।

इस अवसर पर छगन जोशी, प्रेम सिंह सूडा, अधिवक्ता रामनिवास शर्मा, अधिवक्ता मांगीलाल शर्मा, अधिवक्ता कमलेश पाण्डे, अधिवक्ता शेरसिंह सूडा, महावीर प्रसाद शर्मा, विष्णु जोशी, देवीलाल जोशी, लालचंद शर्मा, सुशील खदरिया सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने युवाओं के भविष्य, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए शीघ्र एवं न्यायसंगत हस्तक्षेप की मांग की।
