ऐलनाबाद। सी.आर.डी.ए.वी. गर्त्स कॉलेज ऑफ एजुकेशन की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधि समिति के तत्वावधान में विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास एवं तार्किक क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से “क्या ऑनलाइन शिक्षा पारंपरिक शिक्षा से बेहतर है?” विषय पर एक भव्य वाद–विवाद प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में छात्राओं ने विषय के पक्ष एवं विपक्ष में अपने विचार अत्यंत प्रभावशाली, तार्किक एवं संतुलित ढंग से प्रस्तुत किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य श्री रणजीत सिंह ने की। अपने प्रेरणादायी संबोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास के साथ अपने विचार व्यक्त करने तथा समय के अनुरूप स्वयं को सशक्त बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण एवं जीवन मूल्यों को सुदृढ़ करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने छात्राओं को अपनी छिपी हुई प्रतिभा को निखारने हेतु ऐसे शैक्षणिक मंचों का भरपूर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर कॉलेज प्रबंधन के सदस्यों में चेयरमैन श्री ईश कुमार, डॉली मैम, कार्यकारी निदेशक डॉ. करुण मेहता तथा सी.आर.डी.ए.वी. स्कूल के प्राचार्य कमल मेहता की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम की शोभा और अधिक बढ़ गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में कॉलेज के सहायक आचार्यों एवं स्टाफ सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर सहायक आचार्य अनंत कथूरिया, सहायक आचार्य दीपिका मेहता, सहायक आचार्य सरला देवी, सहायक आचार्य शालू बाला, सहायक आचार्य अराधना मेहता, सहायक आचार्य रेनू बाला एवं सहायक आचार्य मनीष अरोड़ा सहित अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। विशेष रूप से सहायक आचार्य अनंत कथूरिया ने छात्राओं को निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते हुए उन्हें मंच पर निर्भीक होकर बोलने तथा आत्मविश्वास के साथ अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया, जिससे छात्राओं में विशेष उत्साह एवं सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। इस अवसर पर डॉली मैम ने अपने वक्तव्य में पारंपरिक शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यद्यपि डिजिटल युग में ऑनलाइन शिक्षा उपयोगी है, किंतु इसके साथ-साथ पुस्तक पढ़ने की आदत को बनाए रखना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं को नियमित रूप से पाठ्यपुस्तकों एवं अन्य ज्ञानवर्धक पुस्तकों के अध्ययन के लिए प्रेरित किया। प्रतियोगिता में टीम ‘ए’ ने ऑनलाइन शिक्षा के पक्ष में तथा टीम ‘बी’ ने पारंपरिक शिक्षा के पक्ष में अपने विचार प्रस्तुत किए। दोनों ही टीमों ने विषय के विभिन्न पहलुओं पर अत्यंत तार्किक एवं प्रभावशाली तर्क रखे। निर्णायक मंडल द्वारा प्रस्तुत तर्कों, आत्मविश्वास एवं विषय की गहन समझ के आधार पर पारंपरिक शिक्षा का समर्थन करने वाली टीम ‘बी’ को विजेता घोषित किया गया, जिसमें महक सरदाना, अनिक्शा, अनिता एवं प्रिया शामिल रहीं। कार्यक्रम का मंच संचालन सहायक आचार्य शालू बाला द्वारा अत्यंत कुशलता एवं प्रभावशाली ढंग से किया गया, जिससे संपूर्ण आयोजन सुव्यवस्थित एवं अनुशासित रूप से संपन्न हुआ। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य छात्राओं में अभिव्यक्ति क्षमता, तार्किक सोच एवं नेतृत्व कौशल का विकास करना रहा। कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण एवं प्रेरणादायक वातावरण में हुआ।
