हनुमानगढ़। नि:शुल्क शिक्षा का अधिकार यानि आरटीई के तहत बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश देने पर सरकार की तरफ से मिलने वाले बजट का अभी तक भुगतान न होने से निजी शिक्षण संस्था संचालन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। भुगतान न होने की वजह से संस्थान संचालक अपने टीचर्स को भुगतान नहीं कर पा रहे। पूरा साल निकलने के बाद भी आरटीई का भुगतान नहीं हुआ। प्रथम किश्त अक्टूबर माह में मिलनी चाहिए थी। लेकिन अभी तक उसका भुगतान भी नहीं हुआ है। स्कूल संचालन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एसआरएस प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन जिलाध्यक्ष सुरेश चन्द्र शर्मा ने बताया कि वर्तमान में आरटीई पूरे राजस्थान के स्कूलों के लिए मुख्य समस्या बनकर रह गई है।

आरटीई में प्रवेश संबंधी जो कठिनाई आ रही है, उनमें पीपी 1, पीपी 3, पीपी 4, पीपी 5 शामिल है। सरकार की ओर से उसमें पढ़ाने के लिए कहा जा रहा है लेकिन पीपी 3, पीपी 4 और पीपी 5 का बजट नहीं दिया जा रहा। आरटीई का बजट केवल कक्षा प्रथम से दिया जा रहा है। इस संबंध में हाईकोर्ट में संस्थाएं जीती हैं। उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने भी निर्णय दिया है कि प्री प्राइमरी क्लास पीपी 3, पीपी 4 व पीपी 5 में एडमिशन देंगे। सरकार को उसका भुगतान करना होगा। उन्होंने बताया कि अभी तक सरकार की ओर से सत्र 2026-27 के संबंध में निर्देश जारी नहीं किए हैं। निजी शिक्षण संस्थान उसका इन्तजार किया जा रहा है। अगर उन निर्देशों में कोर्ट के आदेशों की पालना नहीं होती है तो निजी शिक्षण संस्थाएं एकजुट होकर 28 जनवरी से शुरू होने वाली विधानसभा में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से यह मुद्दा उठवाया जाएगा। इसके खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। उससे पहले बैठक आहुत की जाएगी। उसमें आगामी रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने मांग की कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय की ओर से जारी किए गए आदेशों की पालना करते हुए निजी शिक्षण संस्थाओं को पीपी 3, पीपी 4 व पीपी 5 का भुगतान किया जाए। साथ ही आरटीई सत्र 2025-26 का बकाया बजट जल्द से जल्द जारी करे ताकि संस्थाओं को राहत मिल सके।
