हनुमानगढ़। सर्दी का मौसम ऐसा मौसम है जिसका इंतजार सभी को रहता है लेकिन यह ऐसा मौसम भी है जब हम पूरे साल के स्वास्थ्य का निर्माण कर सकते हैं। इन चार से पांच माह में खाने की डाइट व जीवनशैली में परिवर्तन कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यह कहना है कि हनुमानगढ़ के उप मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अखिलेश शर्मा का। डॉ. शर्मा के अनुसार इस समय रीजन और सीजन के हिसाब से फल का सेवन करें। जिस क्षेत्र में यानि जिस रीजन में जो फल हो रहा है वह फल उसी सीजन में और उस रीजन के हिसाब से ही पैदा हो रहा है और वही फल और सब्जियां हमें खानी हैं। इस मौसम में हम प्रतिदिन कम से कम 40 मिनट और सप्ताह में पांच दिन व्यायाम करें। इसमें इनडोर, योग से संबंधित आसन, क्रियाएं, प्राणायाम कर सकते हैं। इसमें विशेष तौर पर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गांे और छोटे बच्चों को ध्यान रखने की आवश्यकता है। जो लोग दिल के मरीज हैं, जिनकी हार्ट से संबंधित दवाइयां चल रही हैं उनका इस संदर्भ में ध्यान रखना आवश्यक है कि खाना खाने के बाद बाहर न निकलें। अधिक सर्दी में बाहर न निकलें। आवश्यक होने पर पूरे कपड़े पहनकर ही बाहर निकलें।

कानों व गले को पूरी तरह से ढककर रखें। उन्होंने कहा कि आजकल देखा गया है कि युवा वर्ग व समाज का कुछ हिस्सा जीभ के स्वाद पर अधिक ध्यान दे रहा है। लेकिन कई फूड ऐसे हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं हैं। इस तरह के फूड कार्बाेहाइड्रेड रीच हैं जो मोटापा बढ़ाते हैं। तली हुई चीजों में ट्रांसफेट होता है जो स्वाद का कारण है। समोसे, कचोरी इत्यादि बार-बार तलने से उसमें इस ट्रांसफेट की वजह से स्वाद आता है। लेकिन यह चीजें हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। यह भविष्य में मोटापा, ब्लड प्रेशर, शुगर का कारण बनेंगी। यह हार्ट, दिमाग और किडनी-लीवर के रोग के लिए उत्तरदायी रहेंगी। इसलिए रीजन-सीजन के हिसाब से खाएं। प्रतिदिन व्यायाम करें। जीभ के स्वाद पर नियंत्रण रखकर स्वास्थ्य का ध्यान रखें। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति बिना हांफे दो मंजिल तक सीढ़ियां चढ़ सकता है तो माना जा सकता है कि वह स्वस्थ है। यदि किसी व्यक्ति की ऊंचाई 174 सेंटीमीटर है। उसमें से 100 माइनस करें तो वजन आता है 74 किलोग्राम। अगर उस व्यक्ति का वजन 74 किलोग्राम से एक-दो किलोग्राम कम-अधिक है तो यह आदर्श वजन है। यदि इससे ज्यादा वजन है तो यह चिंता का विषय है। इससे हम अपने दैनिक जीवन में यह पता कर सकते हैं कि हमारा स्वास्थ्य कैसा है। उन्होंने बताया कि हाई रिस्क वाले बच्चों व बुजुर्गांे को सर्दी ज्यादा और गंभीर रूप से प्रभावित करती है। अस्थमा आदि के मरीजों को भी इस मौसम में विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है।
