हनुमानगढ़। महाराजा सूरजमल संगठन की ओर से अद्म्य वीरता, त्याग और उदारता के प्रतीक महाराजा सूरजमल की 319वीं जयंती शुक्रवार को सिविल लाइन्स में मनाई गई। संगठन की महिला विंग सदस्यों ने महाराजा सूरजमल के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके वीरता पूर्वक किए गए कार्यां को याद किया। संगठन की जिलाध्यक्ष किरण जान्दू ने कहा कि महाराजा सूरजमल किशोरावस्था से ही बहुत ताकतवर, साहसी यौद्धा, धैर्यवान, गंभीर, दयालु व दूरदर्शी तथा राष्ट्रवादी सोच के मालिक थे। दूरदर्शी सोच के कारण ही उन्होंने अजेय दुर्ग लोहागढ़ की स्थापना की थी। कांता भादू ने कहा कि महाराजा सूरजमल ने अपने जीवन काल में मुगलों व अन्य राजाओं से 80 युद्ध लड़े और सभी में विजय प्राप्त की। भरतपुर के लोहागढ़ किले पर 13 बार आक्रमण करने के उपरांत भी कभी मुगल व अन्य किले को जीत नहीं पाए। महाराजा सूरजमल के नेतृत्व में जाटों ने मुगलों को परास्त कर आगरा, फरुक्खाबाद से लेकर बिजनौर, पानीपत, दिल्ली तक के क्षेत्र पर अपना अधिकार कर लिया था। सुनीता रेवाड़ ने कहा कि 25 दिसम्बर 1763 की रात को दिल्ली के शाहदरा इलाके के पास हिंडन नदी के किनारे पर मुगल सेना की ओर से घात लगाकर किए गए एक हमले में महाराजा सूरजमल वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनकी वीरता और शौर्य का मुगलों में इस कद़र खौफ था कि मृत्यु के पश्चात भी मुगलों को सहज ही ये विश्वास नहीं हुआ था कि सूरजमल मारे गए। मुगल शासक ये कहते थे कि ‘जाट मरा तब जानिए जब तेरहवीं हो जाएं। सुलोचना मांझू ने कहा कि महाराजा सूरजमल ऐसे महान प्रतापी और पराक्रमी योद्धा थे जो दोनों हाथों से तलवार चलाते थे। उन्होंने एक गरीब ब्राह्मण की लड़की को बचाने के लिए धर्म रक्षा के लिए दिल्ली को फतेह किया था। इस मौके पर सोफिया झोरड़, कांता गोदारा, नीलम भादू, समायरा चौधरी, रेणु जाखड़, सुमन सहारण, अंकिता सिहाग मौजूद रहीं।
