रावतसर। सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदना और शिक्षा के प्रति जिम्मेदारी का एक अत्यंत प्रेरणादायी दृश्य उस समय देखने को मिला, जब अनिल कुमार छिंपा (फार्मासिस्ट) और आकाश नाई ने अपने जन्मदिवस को पारंपरिक उत्सव से हटकर समाज सेवा के माध्यम से मनाने का निर्णय लिया। दोनों युवाओं ने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) से प्रेरणा लेकर आज प्रगति ईंट उद्योग 4 डीडब्ल्यूएम परिसर में कार्यरत वंचित, जरूरतमंद एवं प्रवासी श्रमिक परिवारों के बच्चों के बीच पहुंचकर उन्हें सर्दी से बचाव हेतु गर्म कोट तथा मिठाई का वितरण किया। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच जब बच्चों को गर्म कपड़े मिले, तो उनके चेहरों पर जो मुस्कान दिखाई दी, वह इस आयोजन की सार्थकता को स्वयं बयां कर रही थी। इस सेवा कार्य के दौरान केवल वस्त्र वितरण तक ही सीमित न रहकर समाज के जिम्मेदार नागरिकों ने बच्चों और उनके अभिभावकों से सीधा संवाद भी किया। कार्यक्रम में प्रगति ईंट उद्योग के संचालक नरेंद्र सिंह सुडा, अजीज सिकंदर (इंटेलिजेंस ब्यूरो), शिक्षक दीपक अरोड़ा, सहायक उपनिरीक्षक रविन्द्र मीणा, अधिवक्ता एम.एल. शर्मा एवं समाजसेवी जितेंद्र गोयल विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने एक स्वर में कहा कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति और उसके बच्चों तक शिक्षा, सुरक्षा और समान अवसर पहुंचें। वक्ताओं ने प्रवासी श्रमिकों को संबोधित करते हुए कहा कि भले ही जीवन की परिस्थितियां कठिन हों, लेकिन बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना उनके भविष्य के साथ अन्याय है। शिक्षा ही वह मजबूत आधार है, जो गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक असमानता के दुष्चक्र को तोड़ सकती है। अतिथियों ने अभिभावकों को समझाया कि पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों में संस्कार, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है। कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय की घोषणा भी की गई, जिसने इस आयोजन को और अधिक ऐतिहासिक बना दिया। बताया गया कि आगामी 7 जनवरी से ईंट भट्टा संचालक के सहयोग से भट्टा परिसर में ही एक अस्थायी विद्यालय का शुभारंभ किया जाएगा। इस विद्यालय में प्रवासी श्रमिकों के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्रदान की जाएगी, ताकि काम के चलते वे पढ़ाई से वंचित न रहें। विद्यालय में बच्चों को नियमित पाठ्यक्रम के साथ-साथ नैतिक शिक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक मूल्यों की जानकारी भी दी जाएगी। अनिल कुमार छिंपा और आकाश नाई ने इस अवसर पर कहा कि जन्मदिवस केवल व्यक्तिगत खुशी का दिन नहीं होता, बल्कि यह आत्ममंथन और समाज को कुछ लौटाने का अवसर भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक युवा अपने जीवन के खास दिनों को किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाने से जोड़ दे, तो समाज में सकारात्मक बदलाव निश्चित रूप से आएगा। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज के लिए मिसाल बनते हैं और अन्य लोगों को भी सेवा कार्यों से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने भट्टा संचालकों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन से अपील की कि प्रवासी श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए मिलकर निरंतर प्रयास किए जाएं। कुल मिलाकर यह आयोजन केवल गर्म कपड़े और मिठाई वितरण का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक सशक्त संदेश बनकर उभरा। यह पहल समाज को यह सीख देती है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की नींव रख सकते हैं और यदि शिक्षा को केंद्र में रखकर काम किया जाए, तो वंचित वर्ग के बच्चों का भविष्य भी उज्ज्वल और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

