हनुमानगढ़। पंचायत समिति पल्लू क्षेत्र में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। राजस्थान राजपत्र संख्या दिनांक 21 नवंबर 2025 में ढाणी माहेला को नवसृजित ग्राम पंचायत का मुख्यालय घोषित किया गया था, लेकिन बाद में 28 दिसंबर 2025 को जारी शुद्धिकरण अधिसूचना के माध्यम से कथित रूप से गुमराह करते हुए ढाणी माहेला के स्थान पर ढाणी लेघान को ग्राम पंचायत बना दिया गया। इस निर्णय से क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। ढाणी माहेला व ढाणी बिजारणिया के समस्त ग्रामवासियों ने इस संबंध में जिला कलेक्टर हनुमानगढ़ को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि पूर्व में जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुरूप ढाणी माहेला को ही ग्राम पंचायत मुख्यालय घोषित किया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि शुद्धिकरण के नाम पर किया गया यह परिवर्तन न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि जनभावनाओं की भी अनदेखी है। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार ढाणी माहेला की जनसंख्या 1296 है, जबकि ढाणी लेघान की जनसंख्या 667 तथा ढाणी बिजारणिया की जनसंख्या 622 है। इस प्रकार प्रस्तावित पंचायत की कुल जनसंख्या 2585 होती है, जिसमें ढाणी माहेला सबसे अधिक आबादी वाला गांव है।

जनसंख्या के आधार पर भी ढाणी माहेला को पंचायत मुख्यालय बनाना अधिक तार्किक है। इसके अतिरिक्त ढाणी माहेला में पहले से ही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। पंचायत समिति पल्लू से इसकी दूरी मात्र 8 किलोमीटर है, जबकि ढाणी लेघान पल्लू से लगभग 16 किलोमीटर दूर स्थित है। ढाणी माहेला जिला मुख्यालय, तहसील मुख्यालय एवं विधानसभा क्षेत्र की प्रमुख सड़कों से भी सीधे जुड़ा हुआ है, जिससे यहां पंचायत मुख्यालय होने पर ग्रामीणों को प्रशासनिक सुविधाओं का अधिक लाभ मिल सकता है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि ढाणी माहेला को पंचायत मुख्यालय मानकर पहले ही कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी थीं। पंचायत भवन की जियो-टैगिंग हो चुकी है, पंचायत के वार्डों का गठन कर दिया गया है, पंचायत समिति के ब्लॉक रिकॉर्ड में ढाणी माहेला का नाम दर्ज है तथा राजस्व विभाग द्वारा पंचायत का नक्शा भी जारी किया जा चुका है। साथ ही जिला प्रशासन द्वारा पंचायत की जोन भी निर्धारित की जा चुकी थीं। ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की है कि ढाणी लेघान के स्थान पर ढाणी माहेला को ग्राम पंचायत मुख्यालय घोषित किया जाए, ताकि राजपत्र की मंशा के अनुरूप न्याय हो सके और क्षेत्र में व्याप्त असंतोष समाप्त हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर मांगे पूरी नहीं होती है तो आगामी चुनावो का पूर्ण तरह बहिष्कार किया जाएगा और सड़क जाम जैसे आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
