हनुमानगढ़। श्री नीलकंठ महादेव सेवा प्रन्यास परिवार की ओर से जंक्शन में नगर परिषद उप कार्यालय के पास स्थित शिव कल्याण भूमि परिसर में शुक्रवार को संस्कार स्थल के प्रवेश द्वार का शिलान्यास कर निर्माण कार्य की नींव रखी गई। पंडित धर्मंेद्र तिवाड़ी के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच प्रवेश द्वार की नींव रखकर कार्य का विधिवत शुभारम्भ किया गया।

प्रवेश द्वार के निर्माण के लिए अरोड़वंश सभा जंक्शन अध्यक्षराजेन्द्र मदान परिवार की ओर से 11 लाख रुपए तथा अग्रवाल समाज समिति संरक्षक देवेन्द्र अग्रवाल एवं चांदवासिया परिवार की ओर से 11 लाख रुपए का सहयोग प्रदान किया गया है। दोनों परिवारों के इस सहयोग की अतिथियों ने सराहना करते हुए इसे समाज के लिए अनुकरणीय बताया। कार्यक्रम में चांदवासिया परिवार की ओर से मनीराम चांदवासिया, जयकिशन अग्रवाल, कमल अग्रवाल, राजीव अग्रवाल, ललित अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, डॉ. सुनील अग्रवाल, संदीप अग्रवाल, नवीन अग्रवाल, पवन अग्रवाल, हनुज अग्रवाल, निशान्त अग्रवाल, चेतन्य अग्रवाल, कोनार्क अग्रवाल, जैसिका अग्रवाल, यश अग्रवाल, दीपांशु अग्रवाल एवं गर्वित अग्रवाल वहीं मदान परिवार की और से सुनील मदान, मनीष मदान, अमित मदान की मौजूदगी रही।

कार्यक्रम में भाजपा नेता अमित चौधरी, निवर्तमान सभापति सुमित रणवां, श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरीटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा, प्राइवेट कॉलेज एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष तरुण विजय, अग्रवाल समाज समिति अध्यक्ष सुभाष बंसल, शिवशंकर खड़गावत, अखिल भारतीय महिला अग्रवाल सम्मेलन जिलाध्यक्ष मिताली अग्रवाल, सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष जितेन्द्र गोयल, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बीके चावला, पूर्व उपसभापति नगीना बाई, व्यापारिक संगठन अध्यक्ष प्यारेलाल बंसल, अमरनाथ सिंगला, महावीर रणवां, बलराज मान, गुरदीप बराड़, आशीष विजय, कुलभूषण जिन्दल, हेमन्त गोयल, आशीष पारीक, महावीर शर्मा, रतीराम शाक्य, कमल अग्रवाल, सुरेश धमीजा, कपूरीलाल अग्रवाल, दिनेश गुप्ता, भीष्म कौशिक ने शिरकत की। नीलकंठ महादेव सेवा प्रन्यास के संस्थापक व अध्यक्ष अश्विनी नारंग ने बताया कि कल्याण भूमि समाज की एक अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यकता है, जहां अंतिम संस्कार से जुड़े सभी संस्कार मर्यादा, सम्मान एवं सुविधाओं के साथ सम्पन्न किए जाते हैं। प्रवेश द्वार के निर्माण से संस्कार स्थल को एक सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं सम्मानजनक स्वरूप मिलेगा, जिससे शोकाकुल परिवारों को सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि यह प्रवेश द्वार न केवल एक संरचना होगा, बल्कि सेवा, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक बनेगा।
