
हनुमानगढ़। गांव सतीपुरा में नवनिर्मित ओवरब्रिज पर बीचों-बीच बनाई जा रही दीवार को लेकर अब ग्रामीण भी सड़क पर उतर आए हैं। दीवार बनाने के विरोध में शुक्रवार को ग्रामीणों एवं जागरूक नागरिकों ने मौके पर एकत्रित होकर विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने बीच में बनाई जा रही दीवार का कार्य रुकवा दिया। उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन और संबंधित विभाग इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करते, तब तक दीवार निर्माण का कार्य दोबारा शुरू नहीं किया जाए। लोगों का कहना है कि यह दीवार यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के बजाय दुर्घटनाओं को न्यौता देगी और आमजन के लिए भारी परेशानी का कारण बनेगी। विरोध-प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्रवासियों की लगभग आठ वर्षांे की लंबी प्रतीक्षा और संघर्ष के बाद यह ओवरब्रिज बनकर तैयार होने की कगार पर पहुंचा है, लेकिन अब सरकार और निर्माण एजेंसी की ओर से लिए जा रहे निर्णयों से जनता में भारी रोष है। उन्होंने कहा कि जिस पुल को राहत और सुविधा का माध्यम बनना था, उसे जानबूझकर दुर्घटनाओं का मुखिया बनाया जा रहा है। शेर सिंह शाक्य ने कहा कि आठ वर्ष पहले जब इस पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, तब जनप्रतिनिधियों ने बड़े-बड़े वादे किए थे। उस समय कहा गया था कि यह पुल बठिंडा ओवरब्रिज की तर्ज पर बनेगा, पुल के ऊपर चौराहा होगा, जिससे आवागमन सुगम होगा और एक वर्ष में ही पुल बनकर तैयार हो जाएगा।

लेकिन वास्तविकता यह है कि आठ वर्ष बीत जाने के बावजूद पुल अब जाकर अंतिम चरण में पहुंचा है। इन आठ वर्षांे में आमजन ने भारी परेशानी झेली। निर्माण कार्य के कारण उड़ती धूल-मिट्टी से क्षेत्र में सांस संबंधी बीमारियां बढ़ीं और कई लोग दमा जैसी गंभीर समस्याओं का शिकार हुए। अब जब पुल लगभग बनकर तैयार है, तो बीच में दीवार बनाकर एक नई समस्या खड़ी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि दीवार बनाने से सतीपुरा से संगरिया जाने वाले लोगों को अब पहले सतीपुरा की ओर से पुल पर चढ़ना पड़ेगा, फिर अबोहर साइड उतरकर दोबारा पुल पर चढ़ना होगा। इससे समय, ईंधन और संसाधनों की बर्बादी होगी। साथ ही यातायात का दबाव भी बढ़ेगा। यह व्यवस्था न तो व्यावहारिक है और न ही सुरक्षित। सर्दी के समय धुंध के मौसम में जंक्शन की ओर से हाइवे पर आने वाले वाहन चालकों को पुल के बीच बनी दीवार स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देगी, जिससे दुर्घटनाएं होना तय है। ऐसे में यह ओवरब्रिज सुविधा के बजाय खतरे का कारण बन सकता है। विरोध के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस मुद्दे को लेकर 29 दिसम्बर को महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया और दीवार का निर्माण फिर से शुरू किया गया, तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। इस मौके पर ग्राम पंचायत प्रशासक प्रतिनिधि गुरलाल सिंह, पूर्व सरपंच सिद्धार्थ बलिहारा, रामेश्वर बलिहारा, निर्मल सिंह, परमजीत सिंह, नवनीत सिंह, गुरदिता सिंह, सुरेन्द्र बलिहारा, गुरविन्द्र बराड़, गुरलाभ सिंह, राकेश मूंड, सुरेन्द्र मूंड, गुरबख्श सिंह, पूर्व डायरेक्टर सुनीता बराड़, भैरो वर्मा सहित कई अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
