हनुमानगढ़। जंक्शन स्थित भिक्षु समतानंद सम्यक सम्बुद्ध विहार में शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर भंते करुणा सागर के सानिध्य में कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में उपासक-उपासिकाओं ने हिस्सा लेकर भगवान बुद्ध के उपदेशों को आत्मसात किया। इस मौके पर भंते करुणा सागर ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा का दिन अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण है। यह केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसी दिन भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और उन्होंने मानव जीवन को सही दिशा देने वाले सिद्धांतों का उपदेश दिया। उन्होंने बताया कि भगवान बुद्ध की ओर से दिए गए पंचशील जीवन को सरल, शांत और सदाचारी बनाने का मार्ग दिखाते हैं। यदि व्यक्ति इन सिद्धांतों का पालन करे तो उसका जीवन सुखी और संतुलित बन सकता है। भंते करुणा सागर ने पंचशील के पांच सिद्धांतों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि पहला सिद्धांत अहिंसा है, अर्थात किसी भी जीवित प्राणी को नुकसान न पहुंचाना और सभी के प्रति दया व करुणा का भाव रखना चाहिए। दूसरा सिद्धांत चोरी न करना है, यानी बिना अनुमति किसी की वस्तु ग्रहण न करें और ईमानदारी का पालन करें। तीसरा सिद्धांत कुशील (अशुद्ध आचरण) से दूर रहना है, जिसमें व्यक्ति को अपने व्यवहार को मर्यादित और पवित्र बनाए रखना चाहिए। चौथा सिद्धांत सत्य भाषण है, जिसमें झूठ, चुगली और अपशब्दों से दूर रहकर सदैव सत्य बोलना चाहिए। पांचवां सिद्धांत नशे से दूर रहना है, यानी ऐसे पदार्थांे का सेवन न करें जो मन और शरीर को हानि पहुंचाते हैं और विवेक को कमजोर करते हैं। भंते करुणा सागर ने बताया कि ये पंचशील केवल धार्मिक उपदेश नहीं हैं, बल्कि एक आदर्श जीवन जीने की आधारशिला हैं। इनका पालन करने से व्यक्ति के भीतर शांति, संयम और संतोष का विकास होता है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध के उपदेशों को अपनाने का संकल्प लिया।
