– 162 कथित फर्जी किसानों के नाम पर बीमा पॉलिसियां जारी, बिना जमाबंदी 9 करोड़ के क्लेम की थी तैयारी
हनुमानगढ़। जिले के पल्लू कस्बे में भारतीय स्टेट बैंक शाखा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद गुरुवार को प्रदेश के कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा स्वयं बैंक शाखा पहुंचे और पूरे प्रकरण की जानकारी ली। मंत्री ने बैंक अधिकारियों से 162 किसानों के नाम जारी बीमा पॉलिसियों को लेकर जवाब मांगा, लेकिन शाखा प्रबंधन संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। मामले को गंभीर मानते हुए कृषि मंत्री ने एफआईआर दर्ज करवाने की बात कही है। कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने आरोप लगाया कि बिना कृषि भूमि की जमाबंदी के किसानों के नाम पर फसल बीमा पॉलिसियां जारी कर दी गईं, जबकि कुछ ही दिनों में करोड़ों रुपए का बीमा क्लेम जारी होने वाला था। उन्होंने कहा कि बैंक अधिकारियों से संबंधित किसानों की जमाबंदी मांगी गई, लेकिन कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। मंत्री ने बताया कि कथित रूप से 162 किसानों के नाम पर बैंक में बचत खाते खोले गए। इन खातों के माध्यम से फसल बीमा का प्रीमियम काटा गया, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार का हिस्सा भी शामिल था। इसके बाद बीमा क्लेम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में माफिया, बैंक कर्मियों और बीमा कंपनियों की मिलीभगत सामने आ रही है। किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि जिन किसानों के नाम पर बीमा किया गया, उनमें कोई मुंबई, कोई उड़ीसा, कोई बिहार, कोई बीकानेर, कोई जयपुर और कोई असम का निवासी बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन चकों और गांवों में इन किसानों के नाम दर्शाए गए हैं, वहां राजस्व रिकॉर्ड में उनके नाम कोई भूमि दर्ज ही नहीं है। संबंधित पटवारी की रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की जमीन ही नहीं है तो प्रीमियम कैसे काटा गया और बीमा क्लेम किस आधार पर तैयार किया गया। यह बड़ा सवाल है। मंत्री ने आरोप लगाया कि लगभग नौ करोड़ रुपए के फर्जी क्लेम की तैयारी थी, लेकिन समय रहते मामला सामने आ गया। कृषि मंत्री ने बताया कि इसी प्रकार का मामला पहले सालासर और बीकानेर क्षेत्र में भी सामने आ चुका है। वहां भी कथित रूप से बिना फसल बुवाई के करोड़ों रुपए के बीमा भुगतान की तैयारी की गई थी। उन्होंने कहा कि लोग बैंक को अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रखने का स्थान मानते हैं, लेकिन यदि बैंक और माफिया मिलकर सरकारी योजनाओं में लूट करें तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों की सुरक्षा के लिए बनाई गई है, लेकिन कुछ लोग इसे कमाई का जरिया बना रहे हैं। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं बैंक शाखा प्रबंधक अंकुश मंगलानी ने बताया कि सालासर प्रकरण सामने आने के बाद संबंधित दस्तावेज उच्च अधिकारियों को भेज दिए गए हैं और पूरे मामले की जांच जारी है। उन्होंने कहा कि प्रीमियम उनके कार्यकाल के दौरान ही काटा गया था।
