– धीमी लिफ्टिंग, पुराना बारदाना और जगह की कमी बनी बड़ी समस्या, खरीद अवधि बढ़ाने की उठी मांग
हनुमानगढ़। जंक्शन धानमंडी में इस समय हालात बेहद खराब बने हुए हैं। लगातार बारिश, धीमी सरकारी खरीद व्यवस्था, बारदाने की कमी और लिफ्टिंग में देरी के चलते मंडी में रखे गेहूं को भारी नुकसान पहुंच रहा है। स्थिति यह है कि मंडी में अनाज रखने की जगह तक नहीं बची है, जिससे किसान और व्यापारी दोनों ही संकट में हैं। धानमंडी में अव्यवस्थाओं, धीमी लिफ्टिंग और बारिश से हुए नुकसान के चलते किसान और व्यापारी दोनों ही संकट में हैं और जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। फूडग्रेन व्यापार मंडल अध्यक्ष महावीर सहारण ने बताया कि हाल ही में हुई बारिश के कारण मंडी में रखा गेहूं भीग गया, जिससे उसका रंग काला पड़ जाता है और दाना खराब हो जाता है। ऐसी स्थिति में एफसीआई और अन्य सरकारी एजेंसियां उस गेहूं की खरीद से इनकार कर देती हैं। मजबूरी में वही गेहूं निजी बाजार में 700 से 800 रुपए प्रति क्विंटल के बेहद कम दामों पर बेचना पड़ रहा है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि तिरपाल से केवल ऊपर रखे अनाज की ही सुरक्षा हो पाती है, जबकि नीचे रखा गेहूं पानी से पूरी तरह भीग जाता है। इसके अलावा मंडी से उठाव (लिफ्टिंग) का कार्य भी बेहद धीमी गति से चल रहा है, जिससे लगातार गेहूं जमा होता जा रहा है और नई आवक के लिए जगह खत्म हो गई है।

सहारण के अनुसार सरकार की ओर से जो बारदाना उपलब्ध करवाया जा रहा है, वह पुराना है और कई बार फट जाता है। वहीं सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नया बारदाना उपलब्ध नहीं है, जिसका सीधा असर खरीद प्रक्रिया पर पड़ रहा है। महावीर सहारण ने बताया कि कई किसानों का गेहूं अभी भी घरों में पड़ा है, क्योंकि मंडी में जगह नहीं होने से वे अपनी फसल लेकर नहीं आ पा रहे हैं। किसानों को अपने ठेके और अन्य खर्चांे का भुगतान करना है, लेकिन फसल बिक्री न होने से वे आर्थिक संकट में फंस गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एफसीआई को छोड़कर अन्य एजेंसियों की ओर से भुगतान में भी देरी की जा रही है, जिससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई बार जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद लिफ्टिंग व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि गेहूं खरीद की अवधि 31 मई तक निर्धारित है, लेकिन मौसम लगातार बाधा बन रहा है। कट्टे भरने और उठाव की धीमी गति के कारण मंडी में भारी मात्रा में अनाज जमा हो चुका है। यदि खरीद अवधि आगे नहीं बढ़ाई गई तो लगभग 25 प्रतिशत किसान अपनी फसल एमएसपी पर बेचने से वंचित रह जाएंगे और उन्हें निजी बाजार में नुकसान उठाना पड़ेगा। व्यापारी प्यारेलाल बंसल ने बताया कि हाल की बारिश से गेहूं को भारी नुकसान हुआ है, जबकि मंडी प्रशासन इसे नकार रहा है। उन्होंने कहा कि मौसम अभी भी खराब बना हुआ है और आगे भी बारिश की संभावना है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। व्यापारियों ने मांग की है कि मंडी में जल निकासी के लिए पक्के नाले या पाइप लाइन की व्यवस्था की जाए ताकि बारिश का पानी फसलों तक न पहुंचे।
