-पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित, किसानों को कुदरती खेती से जोड़ने का लिया संकल्प
हनुमानगढ़। हमारा कुदरती खेती संस्थान के तत्वावधान में शुक्रवार को हकीकत के संरक्षक स्वर्गीय ओमप्रकाश मांझू की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा एवं संस्थान की महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लेकर मांझू के चित्र पर पुष्प अर्पित किए तथा उनके प्रकृति प्रेम, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक खेती के प्रति समर्पण को याद किया। कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए संस्थान से जुड़े मनीराम पूनिया ने कहा कि स्वर्गीय ओमप्रकाश मांझू का पूरा जीवन मिट्टी, जल और प्रकृति की रक्षा के लिए समर्पित रहा। वे हमेशा रसायन मुक्त खेती और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के पक्षधर रहे। उन्होंने कहा कि आज के समय में बढ़ते रासायनिक प्रदूषण और जमीन की उर्वरा शक्ति में लगातार हो रही कमी को देखते हुए प्राकृतिक खेती ही किसानों और समाज के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रही है।
उन्होंने कहा कि मांझू द्वारा लगाए गए विचारों के पौधे को वटवृक्ष बनाना ही संस्था और सभी सदस्यों का लक्ष्य रहेगा तथा यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने संकल्प लिया कि आने वाले समय में गांव-गांव जाकर किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक किया जाएगा और अधिक से अधिक किसानों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। बैठक में संस्थान की आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। निर्णय लिया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान जागरूकता अभियान चलाकर प्राकृतिक खेती के लाभ बताए जाएंगे। इसके तहत विशेष शिविरों का आयोजन कर किसानों को रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों से होने वाले नुकसान की जानकारी दी जाएगी। साथ ही किसानों को घर पर ही जीवामृत, घनजीवामृत तथा प्राकृतिक कीटनाशक बनाने का निःशुल्क प्रशिक्षण भी उपलब्ध करवाया जाएगा। बैठक में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि स्वर्गीय ओमप्रकाश मांझू की स्मृति में “धरती पुत्र सम्मान” शुरू किया जाएगा। इसके अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्थानीय किसानों एवं समाजसेवियों को सम्मानित किया जाएगा। संस्थान के अध्यक्ष भगवान सिंह खुड़ी ने कहा कि “ओमप्रकाश मांझू जी ने जिस कुदरती खेती का सपना देखा था, वह आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। रासायनिक खादों से जमीन बंजर होती जा रही है और समाज विभिन्न बीमारियों से घिरता जा रहा है। ऐसे में प्राकृतिक कृषि ही स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य का एकमात्र रास्ता है।” उन्होंने कहा कि संस्था का सपना “जहर मुक्त हो हनुमानगढ़ अपना” है और इसी उद्देश्य को लेकर लगातार कार्य किया जाएगा। इस अवसर पर संस्थान के सचिव प्रेम महिया, कोषाध्यक्ष प्रवीण गोदारा, राजेंद्र गोदारा, मदन ज्यानी, बलजिंदर सिंह, भागीरथ बेनीवाल, नरेश बेनीवाल, राहुल शर्मा, काशीराम कस्वां, राकेश गोदारा, हरदीप सिंह, सौरभ, राजेंद्र कुमार, केशव सहित क्षेत्र के अनेक प्रगतिशील किसान और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
