हनुमानगढ़। 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के आयुर्वेद एवं योग विभाग की ओर से गुरुवार को विशेष योग व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं आमजन को योग के वैज्ञानिक महत्व, उसके व्यावहारिक लाभों तथा स्वस्थ जीवनशैली में उसकी भूमिका के प्रति जागरूक करना था। इस मौके पर श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो व्यक्ति के तन, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करती है। उन्होंने युवाओं से नियमित योगाभ्यास अपनाने और इसे जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद आयुर्वेद प्राकृतिक चिकित्सालय के उपनिदेशक डॉ. तीर्थ शर्मा ने योग और आयुर्वेद के परस्पर संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों ही भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण विधाएं हैं, जो व्यक्ति को रोगमुक्त और स्वस्थ जीवन की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। उन्होंने नियमित योगाभ्यास, संतुलित आहार और प्राकृतिक जीवनशैली को बेहतर स्वास्थ्य का आधार बताया। वहीं डॉ. कुलदीप ने योग के मानसिक एवं आध्यात्मिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि योग आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और एकाग्रता को बढ़ावा देता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन योग और प्राणायाम के लिए समय निकालने की प्रेरणा दी। योग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका जोशी ने योग दिवस की थीम और विश्वविद्यालय की ओर से योग के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि योग केवल एक दिवस तक सीमित नहीं, बल्कि जीवनभर अपनाई जाने वाली स्वस्थ जीवन पद्धति है। डॉ. कृष्णकांत नागरगोजे ने योग के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग केवल आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासित जीवन, मानसिक शांति, नैतिक मूल्यों और आत्मिक उन्नति का भी माध्यम है। कार्यक्रम में डॉ. राकेश, डॉ. कीर्ति मौर्य, सुरेन्द्र कुमार, अरविंद तथा अतुल सहित विभाग के अन्य शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने तथा स्वस्थ समाज के निर्माण में इसकी भूमिका को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
