पीलीबंगा। खोथावाली ग्राम सेवा सहकारी समिति में लाखों रुपये के कथित घोटाले के विरोध में ग्रामीणों ने समिति पर ताला जड़ दिया है। किसानों ने समिति के अध्यक्ष को एक ज्ञापन सौंपकर वर्तमान व्यवस्थापक को हटाने की मांग की है। उनका आरोप है कि उनकी जानकारी के बिना उनके नाम पर ऋण लिए गए और उन्हें डिफाल्टर घोषित कर दिया गया। यह मामला तब सामने आया जब सहकारी समिति अधिनियम की धारा 155 के तहत हुई जांच में तत्कालीन अध्यक्ष, सहायक व्यवस्थापक, सहायक कर्मचारी और एक अन्य व्यक्ति को नियम विरुद्ध लाखों रुपये के भुगतान उठाने का दोषी पाया गया।

घोटाला उजागर होने के बाद किसानों ने वर्तमान व्यवस्थापक प्रेम थोरी पर भी नियम विरुद्ध भुगतान उठाने और गबन का आरोप लगाया है। केंद्रीय सहकारी बैंक द्वारा उन्हें डिफाल्टर घोषित किए जाने से उनमें भारी रोष है। किसान रेशम सिंह पुत्र जसवंत सिंह ने बताया कि “मेरी पिता की मृत्यु के बाद जो सहकार बीमा का क्लेम आया वो सहकारी बैंक में जमा करवाकर खाता बंद करवाना था लेकिन उन्होंने वो राशि व्यवस्थापक प्रेम थोरी ने अपने पास रखी और मुझे उसका नोड्यूज दे दिया गया। बैंक में यह राशि अब 68000 से बढ़कर 91000 रुपये हो गई, जिससे बैंक ने मुझे डिफाल्टर सूची में जोड़ दिया है।

इसी तरह किसान विचित्र सिंह पुत्र करतार सिंह ने बताया कि जमीन स्थानान्तरित करने के लिए पटवारी को नो ड्यूज देने के लिए सहकारी समिति को 82000 नगद करीब साढ़े तीन साल पहले जमा करवाये गए थे। जो राशि बैंक में जमा न होने के चलते यह राशि बढ़कर 114,000 रुपये हो गई। जिससे बैंक ने हमे डिफाल्टर घोषित कर दिया। इसके अलावा मिठू सिंह पुत्र जोरा सिंह के 87000 रुपये, जो अब बढ़कर 1 लाख 27 हजार रुपये हो गए है, जिन्होंने पेमेंट समिति को चुकाने के बाद भी डिफाल्टर घोषित किये गए। ठीक इसी तरह से दर्जनों किसानों के साथ नो ड्यूज देकर बैंक में पैसा जमा नहीं करवाकर किसानों के साथ धोखाधड़ी की गई है। वहीं व्यवस्थापक प्रेम थोरी का कहना है कि ” हमारे जिन किसानों के पैसे जमा हुए उनको नोड्यूज दिया गया है। अब बैंक को जमा करवाना समिति का काम है।
