संगरिया। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में नेहरू पार्क में अपने स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम ‘आरोग्य’ के अंतर्गत दो दिवसीय विशाल योग एवं ध्यान साधना शिविर का आयोजन किया गया। शिविर के प्रथम दिवस संस्थान की ओर से योगाचार्य स्वामी विज्ञानानंद जी ने योग साधकों को भारतीय संस्कृति की महान धरोहर योग के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है, जो तन, मन और आत्मा की एकात्म अवस्था का परिचायक है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाला तथा स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए समग्र दृष्टिकोण प्रदान करने वाला विज्ञान है। उन्होंने कहा कि योग जीवन के प्रत्येक आयाम में संतुलन, सामंजस्य एवं समग्रता स्थापित करता है और मानव जीवन को केवल दीर्घायु ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण एवं उद्देश्यपूर्ण भी बनाता है।

स्वामी विज्ञानानंद जी ने कहा कि आज योग को केवल कुछ योगासनों और प्राणायामों तक सीमित समझ लिया गया है, जबकि योग का वास्तविक अर्थ इससे कहीं व्यापक है। उन्होंने बताया कि योग शब्द संस्कृत की ‘युज्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है ‘जुड़ना’। अर्थात् तन, मन और आत्मा की एकात्म अवस्था ही योग है। उन्होंने महर्षि पतंजलि के योग सूत्र “योगः चित्त वृत्ति निरोधः” का उल्लेख करते हुए कहा कि चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है और यही “योगः कर्मसु कौशलम्” की अवधारणा को सिद्ध करता है। उन्होंने कहा कि योग मानव चेतना के परिष्कार एवं आध्यात्मिक उत्कर्ष का सशक्त माध्यम है तथा स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन की आधारशिला भी योग ही है। इस अवसर पर स्वामी जी ने पातंजलि योग सूत्र के अनुसार साधकों को ताड़ासन, दण्डासन, कटिचक्रासन, अर्द्धचंद्रासन, द्विचक्रिकासन, भुजंगासन, नाड़ी शोधन एवं अनुलोम-विलोम प्राणायाम का विधिवत अभ्यास कराया तथा इनके वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य संबंधी लाभों की जानकारी भी दी।

उन्होंने बताया कि योग की वैश्विक महत्ता को स्वीकार करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव पारित किया था। कार्यक्रम में उपस्थित सभी योग साधकों ने शिविर की सराहना करते हुए इसे स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम का आयोजन श्री गुरु आशुतोष महाराज जी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
