उदयपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने मंगलवार को उदयपुर में राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। देबारी स्थित जिंक स्मेल्टर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पायलट ने आरोप लगाया कि राजस्थान में सरकार जनप्रतिनिधियों के बजाय अधिकारियों के भरोसे चल रही है और सत्ता पक्ष के मंत्री, सांसद व विधायक भी अपनी बात सरकार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। पायलट ने कहा कि भाजपा के जनप्रतिनिधि अपनी ही सरकार में उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गंभीर स्थिति बताते हुए कहा कि सरकार में जवाबदेही पूरी तरह खत्म हो गई है। उन्होंने युवाओं के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य खराब कर दिया है। सरकार रोजगार देने में विफल रही है और परीक्षाओं से लेकर परिणामों तक लगातार अनियमितताएं सामने आ रही हैं। छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा और पारदर्शी व्यवस्था चाहिए, लेकिन सरकार इस दिशा में असफल साबित हुई है। पायलट ने कानून व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की मौतों ने चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोल दी है, जबकि स्कूलों की छत गिरने जैसी घटनाओं में बच्चों की जान जा रही है। हाईकोर्ट को सरकार को फटकार लगानी पड़ रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराध, सड़क हादसों और दुष्कर्म की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने पंचायत, निकाय और छात्रसंघ चुनाव समय पर नहीं कराने को लेकर भी राज्य सरकार की आलोचना की। पायलट ने कहा कि संविधान के अनुसार प्रत्येक पांच वर्ष में चुनाव कराना अनिवार्य है, लेकिन सरकार जनता के गुस्से के डर से चुनाव टाल रही है। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए पायलट ने कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण अहंकार आ गया है। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वास्तविक जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हो रही और केवल लीपापोती की जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री के “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा” के नारे पर भी सवाल उठाए। संसद और परिसीमन के मुद्दे पर पायलट ने कहा कि विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है। उनका आरोप था कि परिसीमन की प्रक्रिया संविधान के अनुसार जनगणना और परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद ही होनी चाहिए, लेकिन सरकार इस प्रक्रिया को दरकिनार करना चाहती है। ईंधन नीति पर बोलते हुए उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एथेनॉल संबंधी निर्णयों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता पर कोई विकल्प थोपा नहीं जाना चाहिए, बल्कि लोगों को अपनी पसंद का अधिकार मिलना चाहिए। पायलट ने दावा किया कि किसान खुश नहीं हैं, युवा परेशान हैं और प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह है और पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार की नीतियों को जनता के सामने रखकर प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। इस अवसर पर उदयपुर देहात कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा, शहर अध्यक्ष फतहसिंह राठौड़, मावली विधायक पुष्करलाल डांगी, पूर्व मंत्री डॉ. मांगीलाल गरासिया, कांग्रेस नेता पंकज शर्मा सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
