– हाई रिस्क गर्भवतियों की समय पर पहचान व सुरक्षित मातृत्व पर जोर
हनुमानगढ़। जिले में गर्भवती महिलाओं की सघन स्क्रीनिंग एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व स्वास्थ्य सेवाएं (क्वालिटी एएनसी) सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 15 जुलाई से चल रहे पांच दिवसीय विशेष अभियान के तीसरे दिन शुक्रवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों ने जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं उपस्वास्थ्य केन्द्रों का निरीक्षण कर गर्भवती महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। अभियान के तहत विशेष अभियान की मॉनिटरिंग के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत शर्मा ने पीएचसी लिखमीसर का औचक निरीक्षण किया। इसी प्रकार, जयपुर स्वास्थ्य विभाग आए हनुमानगढ़ जिला प्रभारी डॉ. पवन कुमार ने ब्लॉक भादरा में सब सेंटर गदरा एवं डीपीओ सुदेश कुमार पीएचसी उत्तराधाबास, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अखिलेश शर्मा ने टिब्बी ब्लॉक में पीएचसी मेहरवाला एवं नोहर ब्लॉक यूपीएचसी नोहर, आरसीएचओ डॉ. सुनील विद्यार्थी एवं डीपीसी अनिश गांधी ने संगरिया ब्लॉक में पीएचसी लीलांवाली, डीपीसी डॉ. प्रीत मोहिन्द्र सिंह एवं डीपीओ जितेन्द्र सिंह ने रावतसर ब्लॉक एवं डीपीसी (आशा) संदीप कुमार ने पीलीबंगा ब्लॉक के सब सेंटर कान्हेवाला सहित अन्य चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान एवं प्रबंधन, एएनसी सेवाओं की गुणवत्ता, आवश्यक जांचों की उपलब्धता, गैप एनालिसिस, रिकॉर्ड संधारण, रेफरल व्यवस्था, दवा एवं जांच सुविधाओं तथा गर्भवती महिलाओं की नियमित फॉलोअप व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया। साथ ही चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ की कौशल क्षमता को और सुदृढ़ बनाने, प्रत्येक गर्भवती महिला की समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने तथा जटिल मामलों की शीघ्र पहचान कर उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करने के निर्देश दिए।
जिला प्रभारी ने स्वयं किया स्वास्थ्य परीक्षण
हनुमानगढ़ जिला प्रभारी डॉ. पवन कुमार ने सब सेंटर गदरा में स्वयं गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर स्वास्थ्यकर्मियों को बताया कि कुशल मॉनिटरिंग ही गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला का निर्धारित समय पर एएनसी चैकअप, रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, शुगर, वजन, भ्रूण की वृद्धि सहित सभी आवश्यक जांचें सुनिश्चित की जाएं, ताकि किसी भी संभावित जटिलता की समय रहते पहचान कर सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की अलग से सूची बनाकर नियमित फॉलोअप किया जाए तथा उन्हें संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया जाए।
सीएचसी-पीएचसी पर हुई सेक्टर बैठक
सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने निरीक्षण के उपरांत पीएचसी लिखमीसर में आयोजित सैक्टर बैठक में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों को जानकारी दी कि अभियान का उद्देश्य केवल गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग करना ही नहीं, बल्कि प्रत्येक गर्भवती महिला तक गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना, संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान करना तथा सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना है। इसके लिए सभी चिकित्सा संस्थानों पर नियमित मॉनिटरिंग, गुणवत्तापूर्ण एएनसी सेवाएं एवं स्वास्थ्यकर्मियों की सतत क्षमता वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी सीएचसी एवं पीएचसी पर आयोजित सेक्टर बैठकों में भी जिला स्तरीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, एएनएम एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को क्वालिटी एएनसी, सुरक्षित मातृत्व, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के प्रभावी प्रबंधन, समय पर रेफरल, प्रसव पूर्व आवश्यक उपचार, काउंसलिंग एवं मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीतियों के संबंध में मार्गदर्शन दिया।
चिकित्सा संस्थानों में दी गई गुणवत्तापूर्ण एएनसी सेवाएं
सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि जिले में शुक्रवार को भी गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक जांचें की गईं तथा हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) वाली महिलाओं की पहचान कर उनका विशेष प्रबंधन सुनिश्चित किया गया। चिकित्सा संस्थानों पर गर्भवती महिलाओं का रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, रक्त शर्करा, वजन, मूत्र जांच सहित अन्य आवश्यक प्रसव पूर्व जांचें की गईं। साथ ही भ्रूण के विकास का आकलन कर आवश्यकतानुसार चिकित्सकीय परामर्श, आयरन-फोलिक एसिड एवं कैल्शियम की दवाएं उपलब्ध कराई गईं। एचआरपी वाली महिलाओं का अलग से चिह्नांकन कर उनका नियमित फॉलोअप एवं समय पर रेफरल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं को संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच, संस्थागत प्रसव, प्रसव के चेतावनी संकेतों की पहचान तथा समय पर चिकित्सा संस्थान पहुंचने के संबंध में भी परामर्श दिया गया।
