- नए ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ एप का प्रशिक्षण, फसल के अनुसार खाद की अनुशंसित मात्रा भी बताएगा सिस्टम, क्यूआर कोड से मिलेगा उर्वरक
हनुमानगढ़। किसानों को उर्वरक के लिए कतार में लगने और दुकान-दुकान भटकने से राहत देने के लिए सरकार की ओर से शुरू किए गए नए ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ (एफएफएस) एप का शुक्रवार को कार्यालय संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जिला परिषद हनुमानगढ़ में प्रशिक्षण दिया गया। किसानों और कार्यालय स्टाफ को एप के माध्यम से उर्वरक बुकिंग एवं वितरण की पूरी प्रक्रिया समझाई गई। सहायक निदेशक कृषि डॉ. संजीव भादू ने बताया कि किसान अपने एंड्रॉयड मोबाइल में एफएफएस एप डाउनलोड कर घर बैठे उर्वरक की बुकिंग कर सकेंगे। जिन किसानों के पास एंड्रॉयड फोन नहीं है अथवा वे मोबाइल एप चलाने में सक्षम नहीं हैं, वे सीएससी, ई-मित्र, पैक्स और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से भी उर्वरक की बुकिंग करा सकेंगे। एप में किसान को आधार नंबर या किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी) से लॉगिन करना होगा। मोबाइल फोन पर आए एक बार के पासवर्ड के बाद आधार से जुड़ी जमीन की जानकारी प्रदर्शित होगी।

किसान संबंधित खेत में बोई गई या बोई जाने वाली फसल का चयन करेगा। इसके बाद कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुसार उस फसल के लिए आवश्यक उर्वरक की मात्रा स्वत: प्रदर्शित हो जाएगी। किसान आवश्यकता के अनुसार मात्रा में कुछ कमी या बढ़ोतरी भी कर सकेगा। इसके बाद एप पर उन उर्वरक विक्रेताओं की सूची सामने आएगी, जिनके पास संबंधित उर्वरक उपलब्ध है। किसान अपनी पसंद के विक्रेता का चयन कर क्यूआर कोड जनरेट करेगा। विक्रेता के पास पहुंचने पर क्यूआर कोड के माध्यम से उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
कालाबाजारी और अनावश्यक उपयोग पर भी लगेगी रोक
डॉ. भादू ने बताया कि नई व्यवस्था से किसानों को यह जानकारी घर बैठे मिल जाएगी कि उनके नजदीक किस विक्रेता के पास कौनसा उर्वरक उपलब्ध है। इससे समय की बचत होगी और किसान को बाजार में भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसान की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि भी क्यूआर कोड के माध्यम से उर्वरक प्राप्त कर सकेगा। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था से उर्वरकों की कालाबाजारी, अनधिकृत डायवर्जन और वितरण को लेकर होने वाले विवादों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। अनुदानित उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा और किसान को यह जानकारी रहेगी कि उसकी फसल के लिए कौनसा उर्वरक और कितनी मात्रा उपयुक्त है।
सरकार को वास्तविक समय में मिलेगी जिलेवार उपलब्धता की जानकारी
एफएफएस व्यवस्था के जरिए उर्वरक की वास्तविक समय में निगरानी संभव होगी। इससे सरकार को तत्काल पता चल सकेगा कि किस जिले में कितना उर्वरक उपलब्ध है और कहां कमी है। डॉ. भादू ने बताया कि पहले उर्वरक उपलब्धता की जानकारी सीमित स्तर पर अधिकारियों के माध्यम से मिलती थी, लेकिन अब आईएफएमएस और एफएफएस को आपस में जोड़ दिया गया है। इससे उर्वरक उपलब्धता से संबंधित जानकारी सीधे किसानों तक पहुंच सकेगी। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से सरकार को जिलों की वास्तविक मांग का आकलन करने में भी आसानी होगी और उसी के अनुरूप उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों ने किसानों से नई व्यवस्था का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।
