– ‘बोध’ नशा उन्मूलन कार्यक्रम और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के बीच दो वर्ष के लिए समझौता
हनुमानगढ़। नशे के विरुद्ध जागरूकता, रोकथाम और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘बोध-नशा उन्मूलन कार्यक्रम’, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के साथ नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत दो वर्ष के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से हनुमानगढ़ क्षेत्र में भी नशे के विरुद्ध निरंतर जागरूकता एवं रोकथाम के कार्य किए जा रहे हैं। संस्थान द्वारा विभिन्न गांवों एवं प्रमुख क्षेत्रों में युवाओं सहित समाज के विभिन्न वर्गों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जागरूकता कार्यक्रमों, संवाद और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से नशे जैसी सामाजिक बुराई के विरुद्ध सकारात्मक वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर स्वामी सुखदेवानंद ने कहा कि यह साझेदारी देश में नशे की रोकथाम एवं नशा मुक्ति के प्रयासों को व्यापक स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ‘बोध’ कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं सहित समाज के विभिन्न वर्गों में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा नशे से दूर रहने के लिए सकारात्मक एवं सशक्त वातावरण तैयार करने के प्रयास किए जाएंगे। समझौता हस्ताक्षर के अवसर पर साध्वी शिताभा भारती, ग्लोबल कोऑर्डिनेटर, ‘बोध–नशा उन्मूलन कार्यक्रम’, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, गौरव गुप्ता एवं गौरव सगर ने संस्थान का प्रतिनिधित्व किया। वहीं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से सचिव सुधांश पंत, आईएएस, निदेशक आस्तिक कुमार पांडेय, आईएएस तथा ड्रग प्रिवेंशन एंड प्लानिंग डिवीजन के संयुक्त सचिव डॉ. संदीप आर. राठौड़ की उपस्थिति में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और उन्हें नशामुक्त एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के प्रयासों को व्यापक बनाया जाएगा। ‘बोध-नशा उन्मूलन कार्यक्रम’ आध्यात्मिक जागरूकता, सामाजिक सहभागिता और जन-जागरूकता के माध्यम से नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में कार्य कर रहा है। संस्थान का उद्देश्य नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी देने के साथ युवाओं और समाज को सकारात्मक, स्वस्थ एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन की ओर प्रेरित करना है। एमओयू को इसी प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
