हनुमानगढ़। राजस्थान शिक्षक संघ का दो दिवसीय जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन जिलाध्यक्ष की अध्यक्षता में शनिवार को सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं और मांगों पर चर्चा कर सरकार से उनके समाधान की मांग की गई। जिला मंत्री राम निवास ने कहा कि सरकार बनने के प्रथम 100 दिनों में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण का वादा करने वाले नेताओं ने तीन वर्षांे में न केवल अपनी नैतिकता खोई है, बल्कि वर्षांे से परेशान हजारों शिक्षकों और उनके परिजनों का विश्वास भी खो दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को भ्रष्टाचार मुक्त, स्थाई एवं पारदर्शी नीतिगत स्थानांतरण नीति लागू करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कार्मिक विभाग और शिक्षा विभाग में तालमेल के अभाव के कारण सम्मेलन के दूसरे दिन प्लाटून कमांडर परीक्षा की तैयारी के कार्यक्रम से टकराव की स्थिति बनी। संघ के संरक्षक बृजलाल छिंपा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को शिक्षा के निजीकरण का रास्ता बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से शिक्षा को महंगा करने की कोशिश की जा रही है, जिससे भविष्य में मजदूर, गरीब और किसान वर्ग के बच्चे शिक्षा से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में एक लाख से अधिक पद रिक्त पड़े हैं, लेकिन स्थायी भर्ती करने की बजाय विद्या संबल योजना के तहत पीरियड आधारित शिक्षकों की भर्ती की जा रही है। उन्होंने शिक्षा नीति की पुन: समीक्षा कर कमियों को दूर करने की मांग की। प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेंद्र सहारण ने कहा कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यांे में लगाने से वे अध्यापन कार्य से दूर हो जाते हैं, जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है। सभाध्यक्ष सतीश चोपड़ा ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने से पूर्व सेवारत शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना और पे प्रोटेक्शन के नाम पर वसूली करना शिक्षकों के प्रति अन्याय है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर की मांगों के समाधान के लिए अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के बैनर तले अन्य कर्मचारियों के साथ शिक्षकों को लामबंद होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। जिला मंत्री राम निवास ने बताया कि सम्मेलन में पारित मांगों का मांग-पत्र शीघ्र ही उच्चाधिकारियों के माध्यम से सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
इन मांगों के प्रस्ताव पारित
सम्मेलन में गैर शैक्षणिक कार्यांे से मुक्ति, नई शिक्षा नीति की पुन: समीक्षा एवं सुधार, विवेकानंद विद्यालयों का समय अन्य विद्यालयों के समान करने, पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने, राजनीतिक दुर्भावना से शिक्षकों को प्रताड़ित नहीं करने, प्रतिबंधित जिलों की अवधारणा समाप्त करने, विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत इच्छुक शिक्षकों के स्थानांतरण, तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले सहित विभिन्न मांगों को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए। इसके अलावा 2004 के बाद पदस्थापित शिक्षकों-कर्मचारियों की पीएफआरडीए में जमा राशि जीपीएफ खाते में स्थानांतरित करने, सरेंडर पीएल का नकद भुगतान, पंचायत शिक्षकों को आरजीएचएस का लाभ, विद्यालयों में ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराने, सहायक कर्मचारियों की भर्ती, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षक के पद सृजित करने, बकाया पदोन्नतियां शीघ्र करने, कुक कम हेल्पर का मानदेय 26 हजार रुपए मासिक करने, व्याख्याताओं की प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति, चयनित वेतनमान सहित अन्य मांगों के प्रस्ताव भी पारित किए गए।
