हनुमानगढ़। मनरेगा योजना का नाम बदलने और उसमें किए गए बदलावों के विरोध में कांग्रेस ने केन्द्र सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। कांग्रेस 45 दिन तक सड़कों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन करेगी। इस आंदोलन को ‘मनरेगा बचाओ संग्रामÓ नाम दिया गया है। यह आंदोलन शनिवार, 10 जनवरी से शुरू हो गया जो 25 फरवरी तक 45 दिनों तक चलेगा। आंदोलन के तहत 11 जनवरी को जिला स्तर पर उपवास रखकर अहिंसात्मक ढंग से विरोध दर्ज करवाया जाएगा। उसके बाद 12 जनवरी से 29 जनवरी तक ग्रामीण क्षेत्रों में नुक्कड़ सभाएं की जाएंगी। 30 जनवरी को ब्लॉक स्तर पर धरने-प्रदर्शन होंगे।

30 जनवरी से 6 फरवरी तक जिलों में धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम होगा। इसके बाद 9 फरवरी से 16 फरवरी तक कांग्रेस पार्टी की ओर से विधानसभा का घेराव किया जाएगा। तत्पश्चात पूरे देश में चार संभागों में एआईसीसी लेवल पर बड़ी रैलियों का आयोजन किया जाएगा। शनिवार को जिला स्तर पर मनरेगा बचाओ संग्राम का आगाज विधिवत जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ हुआ। सर्किट हाउस में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला प्रभारी रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा ने बताया कि 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने देश की ग्रामीण जनता के रोजगार की गारंटी के लिए मनरेगा अधिनियम लागू किया था। यह अधिनियम पूरे देश में बीस साल तक सफलतापूर्वक चला। लेकिन जब से भाजपा और मोदी की सरकार आई, तब से मनरेगा पर तलवार लटकनी शुरू हो गई।

रोजगार में भी 50 प्रतिशत की कमी आई। इसका जीता जागता नमूना राजस्थान में पिछले तीन साल से ग्राम पंचायतों को मनरेगा में मैटीरियल का भुगतान तक नहीं हुआ। लेबर का जो भुगतान 15 दिन में होना चाहिए वह छह माह में हो रहा है। इस शासन में लेबर में भी 50 प्रतिशत की कमी आई है। इनकी पॉलिसी थी कि मनरेगा को क्रैश करना है और अपनी नीति अनुसार इसमें बदलाव करना है। इस सरकार ने मनरेगा एक्ट में संशोधन कर इस एक्ट को ही क्रैश कर दिया। नाम बदलने पर आपत्ति नहीं थी लेकिन रोजगार की गारंटी ही छीन ली। अब केन्द्र सरकार तय करेगी कि पूरे देश में कहां-कहां मनरेगा की जरूरत है। वहीं के लिए एक्शन प्लान बनकर आएगा। यह सबसे बड़ा फेरबदल और संशोधन हुआ है। यह लोकतंत्र के लिए गलत है। इससे रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। दूसरा इसमें यह बदलाव किया गया है कि 60 प्रतिशत केन्द्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकार पैसा देगी।

लेकिन राज्य सरकार इतनी बड़ी योजना में 40 प्रतिशत पैसा देकर मनरेगा नहीं चला सकती। केन्द्र का पर्दे के पीछे उद्देश्य है कि मनरेगा को खत्म कर दिया जाए। यह ग्रामीण जनता के साथ अन्याय है। इसका कांग्रेस पार्टी पुरजोर विरोध करती है। कांग्रेस ने फैसला किया है कि इस प्रकार के संशोधन नहीं करने दिए जाएंगे। पुरजोर तरीके से इसका विरोध किया जाएगा। मनरेगा एक्ट में किया गया संशोधन वापस लेने के लिए सरकार को बाध्य किया जाएगा। मनरेगा योजना को बचाने के लिए पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता इस संग्राम में शामिल होगा। पूरे देश में इसके खिलाफ जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मनीष मक्कासर, पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र दादरी, पीसीसी सदस्य भूपेन्द्र चौधरी, मनमोहन सोनी, गुरदीप चहल भी मौजूद रहे।
