हनुमानगढ़। जंक्शन के वार्ड नंबर 24 में मायादेवी के मकान पर कोगटा फाइनेंस कंपनी की ओर से ‘यह संपत्ति कोगटा फाइनेंस के अधीन है’ लिखने पर विवाद खड़ा हो गया। सोमवार को सूचना मिलने पर माकपा कार्यकर्ताओं ने कंपनी की कार्रवाई पर आक्रोश जताते हुए इसे गरीब परिवार को परेशान करने वाला कदम बताया और जिला प्रशासन से मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की। माकपा नेता शेरसिंह शाक्य ने बताया कि मायादेवी ने परिवार की जरूरतों के लिए कंपनी से 10 लाख रुपए का ऋण लिया था। इसमें से करीब 9.50 लाख रुपए ही महिला को मिले, जबकि शेष 50 हजार रुपए बीमा आदि के नाम पर काट लिए गए। महिला ने करीब तीन साल तक किश्तों का भुगतान किया। इसी दौरान उसके पति की मृत्यु हो गई और परिवार में कमाने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं होने से आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। इसके चलते अगस्त तक दो किश्तें बकाया रह गईं।

शाक्य के अनुसार, दो किश्तें बकाया होने पर कंपनी ने नोटिस भेजने के साथ मकान पर संपत्ति कंपनी के अधीन होने की सूचना लिख दी। शाक्य ने आरोप लगाया कि मायादेवी करीब साढ़े सात लाख रुपए जमा करवा चुकी है, इसके बावजूद कंपनी ने 10 लाख रुपए बकाया होने का नोटिस जारी कर दिया। उन्होंने कहा कि संपत्ति कुर्क करने जैसी कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए। उन्होंने शहर में संचालित फाइनेंस कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कम ब्याज का लालच देकर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को ऋण के जाल में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कंपनियों के पंजीकरण और वसूली प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की। शाक्य ने कंपनी प्रतिनिधियों को चेतावनी दी कि दस दिन में मामले का समाधान नहीं होने पर माकपा कार्यकर्ता आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी गरीब परिवार का घर उजड़ने नहीं दिया जाएगा और कंपनी की मनमानी का विरोध किया जाएगा। इस मौके पर माकपा के वार्ड पार्षद गुरनायब सिंह सहित कई वार्डवासी मौजूद रहे।
