– जिले के सवा तीन सौ से अधिक निजी स्कूलों का बजट खत्म, शिक्षकों के वेतन से लेकर बिजली, पानी के बिल चुकाने तक का संकट, 5 नवंबर तक भुगतान का आश्वासन
हनुमानगढ़। राज्य सरकार की ओर से निजी स्कूलों को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत मिलने वाली पुनर्भरण राशि का भुगतान लंबे समय से नहीं किए जाने के कारण निजी शिक्षण संस्थाओं की आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो गई है। करीब डेढ़ साल से भुगतान अटका होने के कारण स्कूल संचालकों के सामने शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन देने से लेकर बिजली, पानी और अन्य जरूरी बिलों के भुगतान का संकट खड़ा हो गया है। दीपावली से पहले भुगतान नहीं हुआ तो जिले के निजी स्कूलों की दीपावली काली रहने की आशंका है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुरेश शर्मा ने बताया कि सेकेंडरी विभाग की पहली और दूसरी किश्त के 35-36 बिल ट्रेजरी के माध्यम से ईसीएस के लिए जयपुर भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद द्वितीय किश्त का भुगतान अटका हुआ है। करीब सवा तीन सौ स्कूलों का बजट खत्म हो चुका है। इस संबंध में विभाग से संपर्क कर बजट की डिमांड भेजने की मांग की गई है। वहीं एलीमेंट्री विभाग की प्रथम और द्वितीय किश्त के सभी बिल भेजे जा चुके हैं। करीब 48 से 50 स्कूलों का भुगतान बाकी है। एलीमेंट्री विभाग के पास बजट उपलब्ध है, इसलिए इन स्कूलों को जल्द भुगतान होने की उम्मीद है। जबकि सेकेंडरी विभाग का बजट आने में अभी समय लग सकता है। उन्होंने बताया कि एसोसिएशन की ओर से राज्य स्तर पर भी लगातार प्रयास किए गए हैं।

मुख्यमंत्री की जनसुनवाई में आश्वासन दिया गया है कि जिन संस्थाओं के बिल ट्रेजरी से ईसीएस के लिए जयपुर भेजे जा चुके हैं, उनका भुगतान 5 नवंबर तक कर दिया जाएगा। इसी उम्मीद में निजी स्कूल संचालक इंतजार कर रहे हैं। सुरेश शर्मा ने कहा कि 4 नवंबर से दीपावली का अवकाश शुरू हो रहा है। ऐसे में स्कूल संचालकों के सामने शिक्षकों का वेतन, ड्राइवरों का भुगतान, बिजली-पानी और मोबाइल फोन के बिल चुकाने की चुनौती है। आर्थिक तंगी के चलते कई स्कूल समय पर इन जरूरी खर्चों का भुगतान भी नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद खेदजनक है कि राज्य कर्मचारियों का वेतन हर माह की पहली तारीख को जारी हो जाता है, जबकि निजी स्कूलों की आरटीई पुनर्भरण राशि करीब डेढ़ साल से लंबित है। उन्होंने मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री और वित्त विभाग के अधिकारियों से मांग की कि निजी स्कूलों की बकाया पुनर्भरण राशि 5 नवंबर तक जारी की जाए, ताकि शिक्षण संस्थाएं अपने कर्मचारियों का भुगतान कर सकें और दीपावली का त्योहार खुशियों के साथ मना सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो समस्त शिक्षण संस्थाओं की दीपावली काली रहेगी।
अभिभावकों पर भी पड़ रहा आर्थिक असर
सुरेश शर्मा ने बताया कि भुगतान में देरी का असर केवल स्कूल संचालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अभिभावक भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री पुनर्भरण योजना और भील कालीबाई योजना के तहत मिलने वाली राशि भी अभिभावकों की ओर बकाया है। अभिभावकों का कहना है कि जब राज्य सरकार से राशि मिलेगी, तभी वे स्कूलों को भुगतान कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि प्रत्येक निजी सेकेंडरी स्कूल में इन दोनों योजनाओं के तहत औसतन 20 से 25 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन विद्यार्थियों की एवज में प्रत्येक स्कूल का करीब 2 से 2.50 लाख रुपए भुगतान बकाया है।
