हनुमानगढ़। श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय में मकर संक्रांति के मौके पर बुधवार को पारंपरिक हवन का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में विश्वविद्यालय के प्रबंधन, शिक्षकों, कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और हवन कुंड में आहुतियां अर्पित कीं। कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा, शांति एवं उन्नति की कामना करना रहा। सभी मौजूद सदस्यों ने एकजुट होकर सामाजिक सद्भाव, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति को आत्मसात करने का संकल्प लिया। हवन का संचालन पंडित रत्नलाल शास्त्री ने किया। हवन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया। इस मौके पर श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि ऐसे आयोजन छात्र-छात्राओं एवं कर्मचारियों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ आपसी एकता और सामूहिक चेतना को मजबूत करते हैं। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति पर यज्ञ-हवन का विशेष महत्व है। इसमें तिल, गेहूं और गुड़ से सूर्य देव और अन्य देवताओं को आहुति दी जाती है, जिससे सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। पंडित रत्नलाल शास्त्री ने मकर संक्रांति के पर्व पर हवन के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि विशेषकर सूर्य गायत्री मंत्र और ओम नमो भगवते वासुदेवाय जैसे मंत्रों का जाप करते हुए यह हवन करने से सूर्य देव की विशेष कृपा बरसती है, जिससे जीवन में तेज, शक्ति और सफलता प्राप्त होती है। मकर संक्रांति भारत के प्रमुख पर्वांे में से एक है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे शुभ और पुण्यकारी माना जाता है। यह पर्व नई शुरुआत, सकारात्मकता और ऊर्जा का प्रतीक के प्रति सम्मान का संदेश देता है।
