हनुमानगढ़। जिले में फरवरी के पहले सप्ताह से ही तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसका असर अब रबी फसलों पर दिखने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार, बीते कुछ दिनों से दिन का तापमान सामान्य से 2 से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक बना हुआ है। रविवार को जिले में अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले एक सप्ताह में तापमान में और वृद्धि होगी। अधिकतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय हल्की ठंड और मावठ की बारिश रबी फसलों के लिए लाभकारी होती है, लेकिन इस साल चार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के बावजूद जिले में मावठ नहीं हुई।
गेहूं, सरसों और चने की फसल के लिए नुकसानदायक
बढ़ता तापमान गेहूं, सरसों और चना जैसी फसलों के लिए हानिकारक हो सकता है। विशेषकर गेहूं की फसल इस समय दाना भरने की अवस्था में है। अधिक तापमान से दाने पतले रहने और कुल पैदावार घटने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। स्थिति को और गंभीर बना रही है इंदिरा गांधी नहर परियोजना में सिंचाई पानी की सीमित उपलब्धता। हाल ही में सिंचित क्षेत्र विकास आयुक्त द्वारा आईजीएनपी में 3 में से केवल 1 ग्रुप का रोटेशन लागू किया गया है। यह व्यवस्था भी 13 मार्च तक ही प्रभावी रहेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, गेहूं के पकने तक सिंचाई पानी की आवश्यकता महसूस होती है।
सिंचाई नहीं होने पर होगा भारी नुकसान
किसानों का कहना है कि बढ़ते तापमान के बीच यदि समय पर सिंचाई नहीं हुई तो गेहूं की फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सीमित पानी के कारण खेतों में नमी बनाए रखना चुनौती बनता जा रहा है। खासकर टेल एरिया के गांवों में पानी की पहुंच और भी कमजोर हो गई है, जिससे वहां के किसान अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
पिछले वर्षां का रुझान भी चिंताजनक
मौसम आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 3-4 वर्षों में फरवरी माह में तापमान औसतन 1.5 से 2 डिग्री बढ़ा है। 2023 और 2024 में भी फरवरी के मध्य तक तापमान 27 डिग्री तक पहुंच गया था। इसका सीधा असर गेहूं उत्पादन पर पड़ा था। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले 10-15 दिनों में मावठ की बारिश नहीं होती और सिंचाई जल की उपलब्धता नहीं बढ़ाई गई, तो रबी उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
