हनुमानगढ़। राजस्थान हाईकोर्ट ने हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी तहसील स्थित राठीखेड़ा गांव में ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री में 10 अक्टूबर 2025 को हुई घटना से जुड़े मामले में अहम टिप्पणी करते हुए एक ही घटना को लेकर दर्ज दूसरी एफआईआर की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया एक ही घटना पर दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज करना न्यायिक सिद्धांतों के विपरीत है। यह आदेश गांव हरिपुरा निवासी किसान बलकौर सिंह ढिल्लों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 10 अक्टूबर 2025 को फैक्ट्री परिसर में कथित रूप से कुछ राजनीतिक नेताओं के उकसावे पर लोगों का जमावड़ा हुआ। आरोप है कि भीड़ ने फैक्ट्री परिसर में घुसपैठ की, अवैध रूप से एकत्रित होकर कानून-व्यवस्था भंग की तथा अन्य दंडनीय कृत्य किए। इस घटना को लेकर पुलिस थाना टिब्बी में पहली एफआईआर संख्या 510/2025 दिनांक 11 दिसम्बर 2025 को दर्ज की गई। इसके बाद, लगभग समान तथ्यों, आरोपों, स्थान और पक्षकारों के आधार पर दूसरी एफआईआर संख्या 511/2025 दिनांक 12 दिसम्बर 2025 को भी दर्ज कर ली गई।
याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि दोनों एफआईआर का आधार एक ही घटना है। घटनास्थल, तिथि, आरोपित व्यक्तियों और कथित अपराधों का स्वरूप समान है। ऐसे में दूसरी एफआईआर दर्ज करना न केवल आपराधिक प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के विरुद्ध है, बल्कि यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग भी है। दलील दी गई कि यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो पुलिस पूरक आरोप-पत्र या आगे की जांच का सहारा ले सकती है, लेकिन उसी घटना पर नई एफआईआर दर्ज करना विधिसम्मत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थापित विधिक सिद्धांत यह है कि एक ही घटना या लेन-देन के संबंध में दूसरी एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। यदि दूसरी एफआईआर का आधार पहली एफआईआर से भिन्न और स्वतंत्र घटना नहीं है, तो वह टिकाऊ नहीं मानी जाएगी। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया यह माना कि प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर मामला एक ही घटना से संबंधित प्रतीत होता है, इसलिए इसमें न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है। अदालत ने राज्य सरकार एवं संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, अगली सुनवाई तक एफआईआर संख्या 511/2025 में आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी गई है।
