हनुमानगढ़। अनुसूचित जनजाति श्रेणी के अंतर्गत धाणका समाज के जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं किए जाने के विरोध में धाणका जनजाति संघर्ष समिति का जिला कलक्ट्रेट के समक्ष चल रहा बेमियादी धरना रविवार को 189वें दिन भी जारी रहा। लंबे समय से मांग लंबित रहने के कारण समाज में रोष लगातार बढ़ता जा रहा है। धरना स्थल पर मौजूद समाज के लोगों ने प्रशासन के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि न्याय की उम्मीद में महीनों से संघर्ष करने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। संघर्ष समिति के पदाधिकारी जितेंद्र धाणका, ज्वाला धाणका और रमेश धाणका ने बताया कि पात्र आवेदकों के जाति प्रमाण-पत्र बिना किसी स्पष्ट लिखित आदेश के जारी नहीं किए जा रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन करने वाले युवाओं के प्रकरणों में बार-बार आपत्तियां लगाकर प्रक्रिया को लंबित किया जा रहा है। इस स्थिति का सीधा असर छात्र-छात्राओं, बेरोजगार युवाओं, मजदूरों और किसानों पर पड़ रहा है। छात्र-छात्राएं छात्रवृत्ति, प्रवेश एवं प्रतियोगी परीक्षाओं से वंचित हो रहे हैं, वहीं कई युवा सरकारी नौकरियों में आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। इसी मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए जंक्शन स्थित किसान भवन में समाज की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी ने एक स्वर में जाति प्रमाण-पत्र जारी करने की मांग दोहराते हुए कहा कि अब धैर्य का बांध टूटता जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि गर्मी, बारिश, सर्दी और पतझड़ जैसे सभी मौसम बीत गए तथा मंत्री, मुख्यमंत्री, विधायक और कलक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। बैठक में जितेंद्र धाणका ने कहा कि आंदोलन अब तक गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्वक चलाया गया है, लेकिन यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो इसे और प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। मार्च माह में बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने का प्रस्ताव भी रखा गया। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि इसके बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो समाज पंचायत, निकाय एवं जिला परिषद चुनावों में मतदान बहिष्कार जैसे कदम पर विचार कर सकता है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि समाज अपने संवैधानिक अधिकारों की प्राप्ति तक पीछे नहीं हटेगा और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को जिला स्तर से राज्य स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।
