हनुमानगढ़। जिले में अखिल भारतीय किसान सभा का 9वां जिला सम्मेलन भव्य और अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ। सम्मेलन में जिले की सभी तहसीलों से करीब 500 प्रतिनिधियों (डेलीगेशन) ने भाग लिया। आयोजन स्थल जाट भवन में किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष पेमाराम ने विधिवत ध्वजारोहण कर सम्मेलन की अध्यक्षता की। सम्मेलन की शुरुआत दिवंगत कॉमरेड हेतराम बेनीवाल को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। सम्मेलन में संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया पूर्ण करते हुए सर्वसम्मति से मंगेज चौधरी को जिला अध्यक्ष तथा रोहितास सोलंकी को जिला महासचिव चुना गया। इसके साथ ही 51 सदस्यीय जिला कमेटी का गठन किया गया, जो आगामी कार्यकाल में जिले भर में किसान आंदोलनों और संगठन विस्तार की जिम्मेदारी संभालेगी। सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष पेमाराम ने कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियां किसान विरोधी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को नकली बीज और नकली खाद के जाल में फंसाया जा रहा है, नहरों में सिंचाई पानी की भारी कमी है और नरेगा जैसी रोजगारपरक योजना को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये सभी नीतियां किसान और मजदूर की कमर तोड़ने का काम कर रही हैं, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सम्मेलन में पूर्व विधायक बलवान पूनिया ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीज विधेयक और अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डील के नाम पर देश की नीतियां अब भारत की नहीं, बल्कि अमेरिका के इशारे पर तय की जा रही हैं। भाजपा सरकार किसान और मजदूर के शोषण की जिम्मेदार है और किसान सभा इस शोषण के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ेगी। नवनिर्वाचित जिला अध्यक्ष मंगेज चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे पूरी ईमानदारी और संघर्ष के साथ निभाया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि अगले जिला सम्मेलन तक जिले में दो लाख किसानों को संगठन से जोड़ा जाएगा। फसल बीमा क्लेम, नहरों में पूरा पानी, नहरों का पुनर्निर्माण, नरेगा की बहाली, नकली बीज और नकली खाद के खिलाफ आंदोलन तथा जमीन नीलामी और कुर्की के विरुद्ध संघर्ष को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर खेत और किसानी पर कुठाराघात नहीं होने दिया जाएगा और जिले में एक नई किसान क्रांति की शुरुआत होगी। सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए रुड़ सिंह ने कहा कि जिले में अखिल भारतीय किसान सभा एक मजबूत संगठन के रूप में उभरी है। फसल बीमा क्लेम, नहरों में पूरे पानी की मांग और टिब्बी आंदोलन जैसे संघर्षों में किसान सभा ने ऐतिहासिक लड़ाइयां लड़ी हैं, जिनसे सरकार को घुटने टेकने पड़े और किसानों की मांगें माननी पड़ीं। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका के साथ ट्रेड डील, नरेगा बचाओ आंदोलन और बीज विधेयक के खिलाफ देशभर के किसान एकजुट होकर दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचेंगे। उन्होंने सभी किसानों और कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि 24 मार्च को अधिक से अधिक संख्या में दिल्ली पहुंचकर सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करें। सम्मेलन का समापन “किसान-मजदूर एकता जिंदाबाद” और “संघर्ष से ही समाधान” के नारों के साथ हुआ।
