हनुमानगढ़। हनुमानगढ़ जिले के करीब पांच सौ किसानों ने अपने खेतों में डिग्गियों का निर्माण तो करवा लिया लेकिन करीब दस माह बाद भी किसानों को अनुदान राशि का भुगतान नहीं हुआ। इससे किसानों में भारी रोष है। उन्होंने सरकार को संयुक्त किसान मोर्चा के तले आंदोलन का अल्टीमेटम दिया है। इस संबंध में शुक्रवार को जंक्शन स्थित किसान भवन में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रेशम सिंह मानुका ने किसानों की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि कई किसानों के लिए साल में केवल एक ही फसल आय का मुख्य साधन होती है, लेकिन उससे भी खेती की लागत पूरी नहीं हो पा रही। ऊपर से जो फसल तैयार होती है, उसकी सरकारी खरीद भी समय पर नहीं होती।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले मूंग की सरकारी खरीद एक नवंबर से शुरू हो जाती थी, जबकि इस बार 24 नवंबर के बाद खरीद शुरू हुई, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। वित्तीय वर्ष 2024-25 को किसानों के लिए ‘धोखे भरा वर्षÓ बताते हुए उन्होंने कहा कि डिग्गियों की प्रशासनिक स्वीकृति जारी होने के बाद किसानों पर 31 मार्च से पहले निर्माण पूरा करने का दबाव बनाया गया। अनुदान रुकने के डर से किसानों ने आनन-फानन में करीब एक बीघा जमीन की खड़ी फसल उखाड़ दी। इससे प्रति किसान 40 से 50 हजार रुपए तक का सीधा नुकसान हुआ।

डिग्गी की खुदाई से निकली मिट्टी हटाने के दौरान आसपास की पकी फसलें भी खराब हो गईं। उन्होंने बताया कि हनुमानगढ़ जिले के करीब 500 किसानों को अब तक वित्तीय वर्ष 2024-25 की प्रशासनिक स्वीकृति के बावजूद अनुदान राशि नहीं मिली है। लगभग तीन लाख रुपए की अनुदानित राशि न मिलने के कारण किसानों को उसका ब्याज खुद भरना पड़ा। निर्माण सामग्री उधार में लेने के बाद भुगतान नहीं हो सका, जिससे किसानों को ऊंची ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ा। स्थिति यह है कि कई किसान अपनी बैंक लिमिट का ब्याज भी नहीं चुका पा रहे हैं और उन पर लगातार पेनल्टी लग रही है। एक ही साल में तीन लाख रुपए की राशि पर दो से तीन लाख रुपए तक का अतिरिक्त आर्थिक नुकसान किसानों को झेलना पड़ा है। मानुका ने कहा कि अनुदान भुगतान की मांग को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन हर बार 15-20 दिन में भुगतान का आश्वासन देकर टाल दिया गया। अब किसानों के सब्र का बांध टूट चुका है और उनकी मांगों की कहीं सुनवाई नहीं हो रही। संयुक्त किसान मोर्चा ने मांग की है कि अनुदानित राशि का भुगतान मय पेनल्टी शीघ्र किसानों के बैंक खातों में किया जाए। यदि सरकार और प्रशासन ने समय रहते समाधान नहीं किया, तो 6 फरवरी को चक्काजाम, कलक्ट्रेट के समक्ष प्रदर्शन अथवा अन्य बड़े आंदोलन किए जाएंगे।
