
हनुमानगढ़। बेटी के जन्म पर बेटा होने जितनी खुशी मनाना समाज में बदलती सोच और जागरूकता का प्रतीक है,। अब बेटियों को लक्ष्मी, गर्व और सौभाग्य का रूप माना जाने लगा है, उनके जन्म पर ढोल-नगाड़े बजते हैं, कारें सजती हैं, और लोग मिठाइयां बांटकर यह संदेश देते हैं कि बेटी और बेटा समान हैं, जो परिवार की खुशियों और भविष्य का आधार हैं, न कि बोझ या पत्थर। कुछ ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया जंक्शन की भट्ठा कॉलोनी, वार्ड 12 निवासी रमेश कुमार के परिवार ने। बेटी के जन्म को लक्ष्मी का आगमन मानते हुए परिवार ने अनूठे अंदाज में खुशियां मनाईं।

जानकारी के अनुसार रमेश कुमार की धर्मपत्नी रेणुबाला ने जंक्शन स्थित बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेटरनिटी होम में दो दिन पहले सुंदर लक्ष्मी रूपी कन्या को जन्म दिया। शादी के 15 साल बाद रमेश कुमार के घर किलकारी गूंजी तो पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिवार ने कन्या जन्म की खुशी में थाली बजाई और मोहल्ले में मिठाई बांटी। इसके बाद बुधवार को जब नवजात व उसकी माता को अस्पताल से घर ले जाने का मौका आया तो गाड़ी को गुब्बारों से सजाया गया और उसमें बैंड-बाजे व डीजे के साथ नवजात व उसकी माता को घर ले जाया गया। यह सब देखकर मोहल्ले के लोग हैरान हो गए। घर पहुंचने पर कन्या व उसकी माता का तिलक निकालकर स्वागत किया गया।

सुरेशिया में मेडिकल स्टोर संचालित करने वाले रमेश कुमार ने बताया कि करीब 15 साल बाद उनके घर में लक्ष्मी आई है। उन्होंने समाज को संदेश देते हुए कहा कि लड़कियां भी लड़कों से कम नहीं होती। वह व उनके परिवार के सदस्य शुरू से ही लड़का-लड़की को एक समान मानते आए हैं। लड़का-लड़की में किसी भी तरह का भेदभाव न करें। बीडीओ नंदकिशोर वर्मा ने कहा कि उनके छोटे भाई की धर्मपत्नी रेणुबाला ने दो दिन पहले ही बच्ची को जन्म दिया। यह पूरे परिवार के लिए सौभाग्य की बात है। 15 साल से उसके भाई की धर्मपत्नी के कोई संतान नहीं हुई थी। लेकिन बेटी जन्म पर पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि आज लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं हैं। दुख-सुख में लड़की ही माता-पिता के काम आती है। इसके कई उदाहरण सामने आ रहे हैं। लड़कियों के जन्म पर भी थाली बजानी चाहिए।
