हनुमानगढ़। जिला मुख्यालय के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्र में स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पीछे करीब 200 से 250 फीट की दूरी पर सरकारी भूमि लंबे समय से उपेक्षा का शिकार होकर जंगल का रूप ले चुकी है। हैरत की बात यह है कि इस स्थान से महज 50 मीटर के फासले पर जिला कलक्टरेट कार्यालय स्थित है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में आमजन, अधिवक्ता एवं अधिकारी-कर्मचारी आते-जाते हैं। खाली पड़ी इस भूमि पर प्रशासनिक परिसर व पार्किंग विकसित करने की मांग उठी है। अधिवक्ता रघुवीर वर्मा ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए बताया कि झाड़ियों और सूखे पेड़ों से घिर चुकी यह भूमि न केवल प्रशासनिक गरिमा को ठेस पहुंचा रही है, बल्कि सुरक्षा, स्वच्छता और सुविधा के लिहाज से भी गंभीर समस्या बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जहां एक ओर ग्रीन और क्लीन अभियान के तहत स्वच्छ व हरित वातावरण का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर कलक्टरेट और एसपी कार्यालय जैसे अति संवेदनशील सरकारी परिसरों के समीप इस स्थान की अनदेखी समझ से परे है। रघुवीर वर्मा ने बताया कि इस भूमि के सदुपयोग को लेकर पूर्व जिला कलक्टर से भी आग्रह किया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी। उन्होंने जानकारी दी कि पूर्व में एससीएसटी सीओ कार्यालय, साइबर पुलिस थाना एवं सीओ सिटी कार्यालय एसपी कार्यालय भवन में संचालित होते थे, जिन्हें बाद में अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया।

इसके अलावा लेबर कोर्ट और कंज्यूमर कोर्ट भी वर्तमान में कलक्टरेट परिसर से दूर संचालित हो रहे हैं, जिससे आमजन और अधिवक्ताओं को अलग-अलग स्थानों पर भटकना पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि इन कार्यालयों, पुलिस थानों और न्यायालयों को इस वीरान पड़ी भूमि पर भवन निर्माण कर एकीकृत प्रशासनिक परिसर के रूप में विकसित किया जाए, तो आमजन को बड़ी राहत मिलेगी। एक ही परिसर में प्रशासनिक, पुलिस एवं न्यायिक सेवाएं उपलब्ध होने से समय की बचत होगी, सुविधा बढ़ेगी और कार्यक्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा। अधिवक्ता रघुवीर वर्मा ने बताया कि यह भूमि इतनी विस्तृत है कि यहां संबंधित कार्यालयों के साथ-साथ अधिवक्ताओं के चैम्बर, स्टाफ सुविधाएं और विशाल पार्किंग भी विकसित की जा सकती है। इससे वर्तमान में सड़कों पर बेतरतीब ढंग से खड़ी होने वाली गाड़ियों की समस्या समाप्त होगी और भविष्य में उत्पन्न होने वाली भीषण पार्किंग समस्या से भी समय रहते निपटा जा सकेगा। रघुवीर वर्मा ने जिला प्रशासन से मांग की कि इस भूमि के सुव्यवस्थित और दीर्घकालिक उपयोग पर गंभीरता से विचार किया जाए। साथ ही जब तक किसी स्थायी योजना पर अमल नहीं होता, तब तक जंगल बन चुकी इस जमीन की तत्काल सफाई कराकर इसे अस्थायी पार्किंग के रूप में विकसित किया जाए, ताकि आमजन को तत्काल राहत मिल सके और प्रशासनिक क्षेत्र की छवि भी बेहतर हो।
