चारणवासी। गांव मलवाणी स्थित श्रीकृष्ण गोशाला में शुक्रवार को भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला, जब मंगल गंगाजल कलश यात्रा के साथ नौ दिवसीय श्रीभगत माल व गौ महिमा कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। इस धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत गांव के ठाकुर जी महाराज मंदिर से हुई, जहां पुरुषों ने हाथों में भगवा ध्वज थामकर यात्रा की अगुवाई की। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए निकाली गई इस यात्रा में 501 महिलाएं सिर पर कलश धारण कर सम्मिलित हुईं, जिनमें विशेष रूप से प्रत्येक कलश पर चार-चार पीपल के पत्ते लगाकर हरियाली और प्रकृति का महत्व समझाया गया। यात्रा के दौरान मुख्य यजमान सत्यप्रकाश सहारण और उनकी पत्नी शारदा ने प्रधान कलश उठाकर धर्म की राह पर चलने का संकल्प दोहराया। डेढ़ किलोमीटर लंबे यात्रा मार्ग पर ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया और पूरा वातावरण ‘जय श्रीकृष्ण’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। डीजे पर बजते राधा-कृष्ण के मधुर भजनों पर श्रद्धालु झूमते-नाचते कथा स्थल पांडाला पहुंचे, जहां विधि-विधान से कलशों की पूजा-अर्चना की गई। गोशाला अध्यक्ष ओमप्रकाश गहलोत ने आयोजन की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि जनसहयोग से आयोजित यह कथा 21 फरवरी तक निरंतर चलेगी, जिसके अंतिम दिन हवन और विशाल भंडारे के साथ प्रसाद वितरण होगा। आयोजन में विशेष रूप से पधारे तळाई गोशाला के संचालक बाबा महेश नाथ ने अपने प्रवचनों में गाय को हिंदू धर्म की धुरी बताते हुए कहा कि गौ पालन से न केवल आध्यात्मिक पुण्य मिलता है, बल्कि यह हर घर की खुशहाली का आधार है। कथावाचक पंडित भीखाराम शर्मा ने कलश की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए इसे ब्रह्मा, विष्णु, महेश और 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास स्थान बताया। उन्होंने नारियल के उदाहरण से जीवन जीने की कला सिखाते हुए कहा कि व्यक्ति को स्वभाव से नारियल की तरह बाहर से अनुशासित और अंदर से दयालु होना चाहिए। इस अवसर पर पूर्व सरपंच माडूराम सहारण, औंकार सिंह, राजपाल बाबल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से गौ माता की सेवा और सनातन परंपराओं के निर्वहन का संकल्प लिया।
