
हनुमानगढ़। सरबंस दानी, सिख धर्म के दसवें गुरु एवं खालसा पंथ के महान संस्थापक गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में बुधवार को गुरुद्वारा सिंह सभा जंक्शन की ओर से शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में नगर कीर्तन निकाला गया। इस दौरान ‘जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल’ के जयघोष और गुरबाणी की मधुर ध्वनि गूंजती रही। पालकी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी विराजमान थे, जिनके आगे संगत नतमस्तक होकर चल रही थी। पंजाब से आए फौजी बैंड के सदस्यों की प्रस्तुति आकर्षण का केन्द्र रही।

नगर कीर्तन गुरुद्वारा साहिब से पंज प्यारों की अगुवाई में रवाना हुआ जो शहर के मुख्य-मुख्य मार्गांे के अलावा गांव सतीपुरा, चक ज्वालासिंहवाला, दलसिंहनगर, गोल्डन सिटी, स्टार सिटी से होता हुआ गुजरा। शाम को पुन: गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर नगर कीर्तन का समापन हुआ। रास्ते में जगह-जगह संगत की ओर से नगर कीर्तन का स्वागत किया गया। नगर कीर्तन में शामिल संगत के लिए जगह-जगह चाय-नाश्ते की सेवा की गई। सेवादार मनदीप सिंह व जगतार सिंह ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए अपना सरबंस वार दिया। उन्होंने हिन्दू धर्म के लोगों पर हो रही क्रूरता का डटकर विरोध किया। उन्होंने जुल्म-जालिम के खिलाफ जंग लड़ी। गुरु गोबिंद सिंह जी ने संगत को सच्चाई के रास्ते पर चलना सिखाया। सिख संगत ही नहीं समूची मानवता को उस रास्ते पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब भी समूची मानवता का ग्रंथ है। इसके प्रति समर्पित होकर इस शहीदी माह में अधिकाधिक बंदगी करें क्योंकि यह माह पवित्र माह माना जाता है।

कर्मजीत सिंह ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा साहिब में मंगलवार को श्री अखंड पाठ साहिब का प्रकाश हुआ। पाठ का भोग गुरुवार को डाला जाएगा। भोग के उपरांत दीवान सजेंगे और कथा कीर्तन का कार्यक्रम होगा। उन्होंने बताया कि नशे से दूर रहकर ज्यादा से ज्यादा लोग धर्म के साथ जुड़ें और गुरुओं की ओर से दिए गए उपदेशों का पालन करें, इसी का संदेश देने के मकसद से नगर कीर्तन का आयोजन किया गया।
