हनुमानगढ़। शहरी क्षेत्र में निराश्रित पशुओं की समस्या गहराती जा रही है। शहर के गली-मोहल्लों व मुख्य मार्गां पर निराश्रित पशु झुंड में खड़े मिल जाएंगे। निराश्रित घूम रहे नंदी किसी भी समय किसी की भी जिंदगी के लिए खतरा बन सकते हैं। बावजूद इसके नगर परिषद की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। नगर परिषद अभियान चलाकर निराश्रित पशुओं को पकड़ने का दावा तो करती है तो लेकिन बावजूद इसके शहर में बड़ी तादाद में निराश्रित पशु घूम रहे हैं। इससे नगर परिषद का अभियान नाम का अभियान बनकर रह गया है।

जागरूक नागरिक विक्रम रामगढ़िया ने कहा कि शहर में जगह-जगह घूम रहे निराश्रित पशु हादसों का बड़ा कारण बने हुए हैं। न तो प्रशासन और न ही नगर परिषद इस समस्या के समाधान के लिए गंभीर नजर आ रहे हैं। सड़कों पर खड़े रहने वाले बेसहारा पशुओं के कारण यातायात व्यवस्था भी बिगड़ रही है। उन्होंने कहा कि गोशाला संचालक भी बेसहारा पशुओं को गोशाला में नहीं रखना चाहते। वे मात्र दुधारू पशुओं को गोशाला में रखते हैं। उन्होंने बताया कि बेसहारा पशुओं की वजह से शहर में कई हादसे हो चुके हैं। इसकी एवज में नगर परिषद को जुर्माना भी भरना पड़ा। लगातार निराश्रित पशुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। नगर परिषद की ओर से अभियान के नाम पर मात्र खानापूर्ति की जाती है। मुख्य मार्गांे पर निराश्रित पशुओं का झुंड खड़ा मिल जाता है। उन्होंने मांग की कि नगर परिषद लगातार अभियान चलाकर शहर में घूम रहे निराश्रित पशुओं को पकड़कर गोशाला में बंद करे।

क्या कहते हैं यातायात प्रभारी
यातायात प्रभारी अनिल चिन्दा के अनुसार सड़कों पर निराश्रित घूम रहे पशुओं से हो रहे हादसों पर अंकुश लगाने के लिए निराश्रित पशुओं के गले में रेडियम पट्टी डाली जा रही है। नगर परिषद की ओर से भी निराश्रित पशुओं को नंदी गोशाला में शिफ्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। यातायात प्रभारी ने भी कहा कि घने कोहरे की वजह से सड़क पर खड़ा पशु नजर नहीं आता जो हादसे का कारण बनता है। इस बारे में यातायात पुलिस की ओर से भी नगर परिषद से पत्र व्यवहार किया गया है।

नगर परिषद ने किए टेंडर : प्रशासक
नगर परिषद प्रशासक-एडीएम उम्मेदीलाल मीना ने बताया बेसहारा पशुओं को गोशाला में रखने व सड़क से हटाने के लिए हाल ही में नगर परिषद की ओर से टेंडर किया गया है। इससे पूर्व भी स्टाफ के जरिए जनसहयोग से निराश्रित पशुओं को पकड़कर गोशाला में बंद किया गया है। यह बात सामने आई है कि कुछ गोशालाओं में रखे जाने वाले पालतू पशुओं को सड़क पर खुला छोड़ दिया जाता है। इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है। अब शहर में बहुत कम जगह देखने को मिल रहा है कि पालतू पशुओं को खुले में छोड़ा गया हो। पालतू पशुओं के मालिकों से भी समझाइश की जा रही है। उम्मीद है कि शीघ्र ही शहर बेसहारा पशुओं से काफी हद तक निजात पा लेगा।
