हनुमानगढ़। कड़ाके की ठंड व शीतलहर से तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। ऐसे में पाला पड़ने की स्थिति में फसलों को नुकसान होने की आशंका में किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। पाला पड़ने की संभावना उस समय होती है जब तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से कम हो जाता है। आसमान साफ हो और उत्तर दिशा से ठंडी हवाएं चलें। उस स्थिति में फसलों को नुकसान होने की आशंका हो सकती है। कृषि विभाग ने पाले से फसलों के बचाव के लिए कृषि सलाह जारी की है। संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार हनुमानगढ़ कार्यालय के कृषि अनुसंधान अधिकारी डॉ. राजेन्द्र बेनीवाल ने बताया कि पिछले तीन-चार दिन से तापमान काफी नीचे आ गया है। ऐसे में पाला पड़ने की संभावना है। ऐसी स्थिति में किसानों को खेत में सिंचाई करनी चाहिए। क्योंकि नमीयुक्त जमीन में काफी देरी तक गर्मी रहती है तथा भूमि का तापक्रम एकदम कम नहीं होता। इस प्रकार पर्याप्त नमी होने पर शीतलहर व पाले से नुकसान की संभावना कम रहती है।

सर्दी में फसल में सिंचाई करने से 0.5 डिग्री से 2 डिग्री सेल्शियस तक तापमान बढ़ जाता है। जिन दिनों पाला पड़ने की संभावना हो उन दिनों फसलों पर घुलनशील गंधक 0.2 प्रतिशत अथवा गंधक का तेजाब 0.1 प्रतिशत की दर से 1000 लीटर प्रति हैक्टेयर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। ध्यान रखें कि पौधों पर घोल की फुहार अच्छी तरह लगे। छिड़काव का असर दो सप्ताह तक रहता है। यदि इस अवधि के बाद भी शीतलहर व पाले की संभावना बनी रहे तो छिड़काव को 15-15 दिन के अन्तर से दोहराते रहें। सरसों, गेहूं, चना, आलू, मटर जैसी फसलों को पाले से बचाने में गंधक तेजाब 0.1 प्रतिशत का छिड़काव करने से न केवल पाले से बचाव होता है, बल्कि पौधों में लौह तत्व की जैविक एवं रासायनिक सक्रियता बढ़ जाती है जो पौधों में रोग रोधिता बढ़ाने में एवं फसल को जल्दी पकाने में सहायक होती है। पौधशालाओं के पौधों एवं सीमित क्षेत्र वाले उद्यानों/नकदी सब्जी वाली फसलों में भूमि के ताप को कम न होने देने के लिय फसलों को टाट, पॉलीथिन अथवा भूसे से ढक दें। वायुरोधी टाटियां, हवा आने वाली दिशा की तरफ यानि उत्तर पश्चिम की तरफ बांधें। नर्सरी, किचन गार्डन में उत्तर-पश्चिम की तरफ टाटियां बांधकर क्यारियों के किनारों पर रात्रि में लगाएं तथा दिन में पुन: हटाएं। दीर्घकालीन उपाय के रूप में फसलों को बचाने के लिए खेत की उत्तरी-पश्चिमी मेड़ों पर तथा बीच-बीच में उचित स्थानों पर वायु अवरोधक पेड़ जैसे शहतूत, शीशम, बबूल, खेजड़ी, अरडू एवं जामुन आदि लगा दिए जाएं, तो पाले और ठण्डी हवा के झौंकों से फसल का बचाव हो सकता है।
