हनुमानगढ़। जिले की हॉकी खेल की प्रतिभाओं में अब निखार आएगा। हॉकी खेल से जुड़े खिलाड़ियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार की ओर से बजट घोषणा के अनुसार जिले को बजट उपलब्ध करवाया गया है। इस बजट से हॉकी टीमों को उच्च गुणवत्ता के वर्ल्ड क्लास श्रेणी के संसाधन उपलब्ध करवाए जाएंगे। जिला खेल अधिकारी शमशेर सिंह ने बताया कि बजट घोषणा 2024-25 में 65.3 में पंचगौरव योजना में एक जिला एक खेल का आवंटन किया गया। इसमें हनुमानगढ़ जिले को हॉकी खेल का आवंटन हुआ। वर्तमान में जिला प्रशासन को बजट उपलब्ध हो चुका है।

खेल उपकरण के लिए लगभग 30 लाख रुपए का बजट मिला है। इसमें कार्यकारी एजेंसी जिला परिषद को बनाया गया है। 17 टीमों के बीच खेल सामग्री वितरित की जानी है। हमारा प्रयास है कि वर्ल्ड क्लास खेल सामग्री की खरीद की जाए। इसमें हॉकी बॉल, डिफेंडर ग्लब्ज, ट्रांसपेरेंट फेस मास्क, गोलकीपर किट सहित अन्य सामग्री शामिल है। इसके लिए जल्द टेंडर कर यह सामग्री टीमों को बांटी जाएगी। उन्होंने बताया कि हनुमानगढ़ जिले में हॉकी का प्रचलन काफी अधिक है। जिले के 10 से 12 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक वर्ग में खेलकर आते हैं। राज्य स्तर पर हनुमानगढ़ की टीम विनर या रनर अप रहती है।

हॉकी के लिए आवश्यक खेल सामग्री उपलब्ध होने से इस खेल को बढ़ावा मिलेगा और बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होगा। उन्होंने बताया कि इसमें एक नियमित कोच के साथ ओलंपियन या एशियन गेम्स मेडलिस्ट गेस्ट कोच लगाने का प्रावधान है। गेस्ट कोच की ओर से 15 दिन या एक माह सेवा दी जाएगी। उसके लिए भी अलग से बजट प्राप्त हुआ है। खिलाड़ियों को उस कोच से कोचिंग करवाई जाएगी। टीम का एक प्रशिक्षण कैंप बठिंडा भी जाएगा। उसके लिए अभी असमंजस की स्थिति है। उन्होंने बताया कि राजीव गांधी स्टेडियम के मेजर ध्यानचंद हॉकी मैदान में कोच की नियुक्ति कर दी गई है और खिलाड़ी नियमित अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि काफी समय पहले भी हनुमानगढ़ की हॉकी टीम राज्य व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिस्सा ले चुकी है।

कई मेडल भी प्राप्त किए। आने वाले खिलाड़ियों के बेहतर भविष्य के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से हर साल पंचगौरव में पांच करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया जाता है। हालांकि इस बार कम बजट आया है लेकिन अगले साल अधिक बजट मिलने की अपेक्षा है। खेल के लिए कम से कम एक करोड़ रुपए का बजट हो ताकि ऐसे गांव जहां हॉकी का प्रचलन है उस गांव में खेल सामग्री पहुंचे और खिलाड़ियों को खेल के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों। खेल में राष्ट्रीय स्तर पर मेडल मिलने पर आउट ऑफ टर्म नौकरी की गारंटी भी है। जिन खिलाड़ियों के पास मेडल नहीं है उनके लिए दो प्रतिशत कोटा भी है। उन्होंने खिलाड़ियों से अपील की कि ज्यादा से ज्यादा हॉकी खेल से जुड़कर अपना भविष्य उज्ज्वल बनाएं।
