हनुमानगढ़। राजस्थान सरकार की आरजीएचएस (राजस्थान सरकारी स्वास्थ्य योजना) को स्वास्थ्य बीमा (इंश्योरेंस) मोड पर देने के प्रस्ताव के विरोध में राजस्थान जलदाय कर्मचारी महासंघ ने मंगलवार को जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। प्रदेश महामंत्री इन्द्राज घोटिया के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि राज्य सरकार की ओर से संचालित आरजीएचएस योजना वर्तमान में कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को कैशलेस और सुगम चिकित्सा सुविधा प्रदान करती है, जो एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना है। इसे बीमा आधारित प्रणाली में बदलने से कर्मचारियों और पेंशनर्स पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर लाभार्थियों को 30 से 50 प्रतिशत तक खर्च स्वयं वहन करना पड़ सकता है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ेगा। साथ ही, मौजूदा कैशलेस सुविधा प्रभावित होने और इलाज में बाधा आने की संभावना जताई गई है। बीमा कंपनियों की ओर से क्लेम अस्वीकृति, जटिल प्रक्रिया, पूर्व अनुमोदन की अनिवार्यता तथा कागजी कार्यवाही बढ़ने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। संगठन ने यह भी बताया कि कर्मचारियों से पहले ही मासिक अंशदान लिया जा रहा है, ऐसे में अतिरिक्त बीमा प्रीमियम लेना न्यायसंगत नहीं होगा। यदि योजना में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार है, तो उसके समाधान के लिए सख्त निगरानी और प्रशासनिक सुधार किए जाने चाहिए, न कि पूरी योजना को ही बदल दिया जाए। ज्ञापन में मांग की गई कि आरजीएचएस को बीमा मोड में बदलने के प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए तथा वर्तमान कैशलेस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। साथ ही अस्पतालों और दवा विक्रेताओं को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने तथा योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस निर्णय को वापस नहीं लेती है, तो राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा, जिसमें विरोध प्रदर्शन, सामूहिक अवकाश, धरना-प्रदर्शन और आवश्यक होने पर उग्र आंदोलन भी शामिल होंगे। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से कर्मचारियों और पेंशनर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की गई है।
