हनुमानगढ़। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत कार्यरत प्रसार भारती के दूरदर्शन केंद्र जयपुर परिसर में पर्यावरण संरक्षण और पक्षी संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल की गई। वृक्ष मित्र एवं मानव सेवा संस्थान, गोलूवाला द्वारा पक्षियों के लिए परिंडे (जल पात्र) और घोंसले लगाने का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसने उपस्थित लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराया। संस्थान के अध्यक्ष नरेंद्र सुथार के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान के तहत दूरदर्शन केंद्र परिसर में कई स्थानों पर परिंडे और घोंसले स्थापित किए गए। भीषण गर्मी के इस दौर में पक्षियों के लिए पानी और आश्रय उपलब्ध कराना इस पहल का मुख्य उद्देश्य रहा। कार्यक्रम में दूरदर्शन केंद्र के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। इस अवसर पर उप महानिदेशक सतीश देपाल, निदेशक अभियांत्रिकी पंकज भूटियानी, कार्यक्रम प्रमुख सीमा विजय, सहायक निदेशक समाचार मुरारी गुप्ता, उपनिदेशक अजय रोहिला, उपनिदेशक मुकेश कुमार अग्रवाल और वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी विनोद सुथार सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर परिंडों में नियमित रूप से जल भरने की जिम्मेदारी भी ली, जिससे यह पहल केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रहकर सतत अभियान के रूप में जारी रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान अध्यक्ष नरेंद्र सुथार ने कहा कि पेड़-पौधे और पक्षी हमारी प्रकृति के मूल आधार हैं और उनका संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि प्रसार भारती जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस प्रकार का कार्य करना उनके लिए गर्व की बात है। साथ ही उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे अपने घरों की छतों, कार्यालयों और आसपास के स्थानों पर परिंडे जरूर लगाएं, ताकि पक्षियों को भीषण गर्मी में राहत मिल सके। उप महानिदेशक सतीश देपाल ने इस पहल को सराहनीय और अनुकरणीय बताते हुए कहा कि प्रसार भारती परिवार पर्यावरण संरक्षण के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को नई दिशा देते हैं और लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक बनाते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। साथ ही प्रसार भारती के कर्मचारियों ने अपने घरों पर भी परिंडे और घोंसले लगाने का वादा किया। यह पहल न केवल पक्षियों के जीवन को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि समाज में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का भी सशक्त माध्यम साबित हो रही है।
