हनुमानगढ़। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों की पालना में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों को न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दो दिवसीय प्रारंभिक प्रशिक्षण कार्यक्रम गुरुवार से शुरू किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष तनवीर चौधरी के मार्गदर्शन एवं सचिव गजेन्द्र सिंह तेनगुरिया के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में वन विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा पुलिस विभाग के समन्वय से अधिकार मित्रों (पैरा लीगल वॉलेंटियर्स) और पैनल अधिवक्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव गजेन्द्र सिंह तेनगुरिया ने बताया कि यह योजना वन सीमा क्षेत्रों, आदिवासी बाहुल्य इलाकों और मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षांे में आबादी वाले क्षेत्रों में पैंथर, लेपर्ड जैसे वन्यजीवों की आवाजाही की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे आमजन की सुरक्षा चुनौती बन रही है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के दिशा-निर्देशों के तहत जारी प्रशिक्षण मॉड्यूल और हैंडबुक के माध्यम से अधिवक्ताओं एवं अधिकार मित्रों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में प्रभावित लोगों को समय पर कानूनी सहायता मिल सके। चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल ऋषिराज बेनीवाल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा पर जानकारी दी। वहीं वन विभाग के एसीएफ सुनील चाहर ने पीपीटी प्रजेंटेशन के जरिए वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व तथा योजना के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक विक्रम सिंह ने अधिकार मित्रों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी तथा संबंधित पुस्तिकाएं और हैंडबुक भी वितरित कीं।
