हनुमानगढ़। श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय हनुमानगढ़ के फॉरेंसिक साइंस एवं साइबर फॉरेंसिक विभाग के बीएससी तृतीय एवं पंचम सेमेस्टर तथा एमएससी तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने झांसी स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला का शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण भ्रमण किया। विभागाध्यक्ष शालिनी चौहान के नेतृत्व में आयोजित इस भ्रमण में संकाय सदस्य ऋषि कुमार भी विद्यार्थियों के साथ मौजूद रहे। विद्यार्थियों ने प्रयोगशाला के विभिन्न विशेषज्ञ प्रभागों का भ्रमण कर अपराध से जुड़े साक्ष्यों के प्राप्ति, संरक्षण, परीक्षण और वैज्ञानिक विश्लेषण की प्रक्रिया को करीब से समझा। इस दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को फॉरेंसिक बायोलॉजी एवं सीरोलॉजी, फॉरेंसिक केमिस्ट्री, टॉक्सिकोलॉजी, फॉरेंसिक बैलिस्टिक्स और डीएनए जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की कार्यप्रणाली की जानकारी दी। साथ ही विभिन्न प्रकार के जैविक, रासायनिक और विषैले साक्ष्यों के परीक्षण में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों से भी अवगत कराया। भ्रमण की खास बात यह रही कि विद्यार्थियों को केवल प्रयोगशाला का अवलोकन करने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी दिया गया। विद्यार्थियों ने विभिन्न परीक्षण तकनीकों और साक्ष्य विश्लेषण की प्रक्रियाओं को व्यावहारिक रूप से समझा। इससे उन्हें वास्तविक फॉरेंसिक जांच की परिस्थितियों और वैज्ञानिक कार्यप्रणाली का अनुभव मिला। इस मौके पर झांसी फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के उप निदेशक मोहम्मद अहमद अंसारी ने विद्यार्थियों के प्रशिक्षण में सहयोग किया। भ्रमण के दौरान करियर मार्गदर्शन एवं संवाद सत्र भी आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को फॉरेंसिक विज्ञान में उपलब्ध रोजगार, उच्च शिक्षा तथा सरकारी एवं निजी संस्थानों में करियर की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। श्री गुरु गोबिंद सिंह चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान अपराध अनुसंधान और न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। प्रयोगशाला में प्रत्यक्ष प्रशिक्षण से विद्यार्थियों के ज्ञान और तकनीकी दक्षता में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ व्यावहारिक एवं रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विभागाध्यक्ष शालिनी चौहान ने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान जैसे व्यावहारिक एवं बहुविषयक क्षेत्र में प्रयोगशाला आधारित प्रशिक्षण बेहद जरूरी है। इससे विद्यार्थी पाठ्यक्रम में पढ़ाए गए वैज्ञानिक सिद्धांतों को वास्तविक केसवर्क, प्रयोगशाला प्रक्रियाओं और आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों से जोड़कर बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। संकाय सदस्य ऋषि कुमार ने भी विद्यार्थियों के साथ प्रशिक्षण गतिविधियों में सहभागिता की और उन्हें प्रयोगशाला में अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक एवं पेशेवर कार्यप्रणाली को समझने के लिए प्रोत्साहित किया।
