हनुमानगढ़। वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत बुधवार को जंक्शन स्थित धानमंडी जीएसएस परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण और जल बचत का संदेश दिया। इस दौरान उपस्थित लोगों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू, डॉ. भारतभूषण शर्मा, प्रदीप ऐरी, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओपी बिश्नोई, जोधपुर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता रिछपाल चारण, अधिशाषी अभियंता अरविंद गढ़वाल, कृष्ण तायल सहित अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और राजस्थान सरकार की पहल पर वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान संचालित किया जा रहा है। यह अभियान 25 मई को गंगा दशहरा से शुरू होकर 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस तक विभिन्न विभागों के माध्यम से चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और जनभागीदारी को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि अभियान को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि प्रत्येक नागरिक जल की एक-एक बूंद के महत्व को समझे। आने वाली पीढ़ियों को ध्यान में रखते हुए जल का विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जल स्रोतों, तालाबों और वर्षा जल के संरक्षण के बिना भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन होगा। डेलू ने कहा कि अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए प्रत्येक नागरिक को पौधारोपण करना चाहिए तथा लगाए गए पौधों और पेड़ों का संरक्षण भी सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने लोगों से अधिकाधिक वृक्षारोपण कर हरित वातावरण बनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि अभियान के माध्यम से प्लास्टिक मुक्त भारत का संदेश भी दिया जा रहा है। सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग से बचने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि प्लास्टिक न केवल पर्यावरण बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है। इसलिए नागरिकों को इसके उपयोग को कम करने और वैकल्पिक साधनों को अपनाने की आवश्यकता है। जोधपुर डिस्कॉम के अधिशाषी अभियंता अरविंद गढ़वाल ने कहा कि जल संरक्षण और पौधारोपण एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि जल है तो जीवन है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को बचाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने चिंता जताई कि पारंपरिक जल स्रोत धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं तथा कई स्थानों पर अतिक्रमण के कारण उनकी उपयोगिता प्रभावित हो रही है। गढ़वाल ने लोगों से पुराने तालाबों, जोहड़ों और अन्य परंपरागत जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया। साथ ही घरों में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) प्रणाली लगाने की सलाह दी, ताकि वर्षा जल का संरक्षण कर उसे उपयोग में लाया जा सके। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया।
