वैज्ञानिकों ने आधुनिक खेती, मृदा स्वास्थ्य, फसल विविधीकरण एवं पशुपालन पर किसानों से किया संवाद
हनुमानगढ़। आत्मा परियोजना के तहत बुधवार को आत्मा परियोजना कार्यालय, हनुमानगढ़ के कॉन्फ्रेंस हॉल में एक दिवसीय कृषक-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के लगभग 75 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक खेती, मृदा स्वास्थ्य, फसल विविधीकरण तथा कृषि एवं पशुपालन से जुड़ी नवीनतम जानकारियों से अवगत कराना था। इस अवसर पर जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव ने संवाद कार्यक्रम में भाग लेते हुए कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में किसानों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना की। उन्होंने किसानों को बीटी कपास पर अत्यधिक निर्भरता कम करते हुए मक्का, सब्जियों एवं बागवानी जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कृषि प्रसंस्करण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। साथ ही हर घर तिरंगा अभियान एवं हरियालो राजस्थान अभियान की जानकारी देते हुए किसानों से अपने घरों एवं खेतों में पौधारोपण करने तथा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान जिला कलक्टर ने किसानों के साथ राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन भी किया। कार्यक्रम में किसानों को जिले में कृषि एवं कृषि से जुड़े विभागों के नवाचारों, योजनाओं एवं सफल किसानों की प्रेरक कहानियों से अवगत कराने के लिए संचालित प्रगतिशील किसान/कृषि विकास पोर्टल का लाइव प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम में उप निदेशक कृषि एवं पदेन परियोजना निदेशक आत्मा सुभाष चन्द्र डूडी ने किसानों का स्वागत किया। उन्होंने आत्मा परियोजना की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए किसानों से वैज्ञानिक सलाह को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी श्री अभिषेक गोदारा ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड एवं संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी दी। कृषि अनुसंधान अधिकारी श्री अमित आहुजा ने बगीचों एवं अन्य फसलों में सूत्रकृमि (निमेटोड) नियंत्रण के उपाय बताए। कृषि अनुसंधान केंद्र, श्रीगंगानगर के वैज्ञानिक डॉ. रघुवीर सिंह मीणा ने खरीफ फसलों की समसामयिक कृषि क्रियाओं एवं फसल चक्र पर विस्तृत चर्चा की। कृषि अनुसंधान अधिकारी एटीसी हनुमानगढ़ डॉ. अनिल कुमार ने खरीफ फसलों में ट्राइकोडर्मा के उपयोग एवं उसके लाभ बताए, जबकि डॉ. राधेश्याम सिहाग ने मृदा स्वास्थ्य, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, धान एवं मक्का की खेती की संभावनाओं तथा फसल अवशेष प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों से फसल अवशेषों को जलाने के बजाय सुपर सीडर, मल्चर एवं एमबी प्लाऊ जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों की सहायता से मिट्टी में मिलाने की अपील की, जिससे मृदा की उर्वरता बढ़ने के साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके। कृषि विज्ञान केंद्र, संगरिया के विषय विशेषज्ञ डॉ. उमेश कुमार ने विशेष रूप से बीटी कपास में कीट एवं व्याधि प्रबंधन पर जानकारी दी, जबकि डॉ. चन्द्रशेखर शर्मा ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती की संभावनाओं पर किसानों को मार्गदर्शन दिया। पशुपालन विभाग के डॉ. सुनील भाखर एवं डॉ. अनिल शर्मा ने वैज्ञानिक पशुपालन, पशु रोग नियंत्रण, टीकाकरण तथा मंगला पशु बीमा योजना सहित विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। उप निदेशक उद्यान डॉ. रमेश चन्द्र बराला ने बागवानी एवं सब्जी फसलों के प्रबंधन, विशेषकर किन्नू, माल्टा, खजूर एवं अमरूद के बरसाती मौसम में रखरखाव तथा विभागीय योजनाओं की जानकारी साझा की। कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए। संजय सहारण (चक 23 जेआरके, गोलूवाला) ने मेड विधि अपनाकर सिंचाई जल की लगभग 50 प्रतिशत बचत एवं अधिक उत्पादन प्राप्त करने का अनुभव प्रस्तुत किया। वहीं नवदीप सिंह (ग्राम ढाबा, संगरिया) ने हाई-टेक खेती, लो-टनल, मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई तथा सब्जियों एवं अन्य व्यावसायिक फसलों के उत्पादन से बेहतर आय अर्जित करने के अपने अनुभव किसानों के साथ साझा किए। कार्यक्रम में सहायक निदेशक कृषि रामप्रताप गोदारा, डॉ. राधेश्याम पारीक, साहबराम गोदारा, कृषि अधिकारी करणजीत सिंह, कृषि अनुसंधान अधिकारी राजेन्द्र बेनीवाल, सहायक कृषि अधिकारी गुरमेल सिंह, कृषि पर्यवेक्षक लवदीप सिंह सहित कृषि विभाग एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
