– बेशकीमती जमीन औने-पौने दामों में लेने का आरोप; आंदोलन तेज करने की चेतावनी
हनुमानगढ़। कोहला क्षेत्र में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। वर्षों से लंबित मुआवजे, जमीन के कम मूल्यांकन और प्रशासनिक नीतियों को लेकर किसानों में गहरी नाराजगी है। हाल ही में आयोजित प्रशासनिक कैंप के बाद भी किसानों की असंतुष्टि कम नहीं हुई, बल्कि अब वे अपने हक के लिए संगठित होकर संघर्ष तेज करने की तैयारी में हैं। किसानों का कहना है कि उनकी पुश्तैनी और उपजाऊ जमीन को बिना वास्तविक आवश्यकता के अधिग्रहित किया गया है, जबकि उन्हें इसका उचित मुआवजा भी नहीं मिला। किसान नेता बहादुर सिंह चौहान ने बताया कि उनकी भूमि का अधिग्रहण वर्ष 2009 में किया गया था, जबकि अवार्ड 2012 में जारी हुआ। उस समय उनकी जमीन का मुआवजा मात्र 2 लाख 61 हजार रुपए प्रति बीघा तय किया गया, जबकि यह जमीन शहर से सटी हुई और अत्यंत मूल्यवान है। वर्तमान में इसी जमीन के बाजार भाव 50 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपए प्रति बीघा तक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हनुमानगढ़ जंक्शन के औद्योगिक क्षेत्र का दूसरा चरण अभी तक खाली पड़ा है और वहां किसी उद्योग के लिए मांग भी नहीं है। इसके बावजूद कोहला में किसानों की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है, जो पूरी तरह से अनुचित है और किसानों के साथ अन्याय है। किसानों ने यह भी कहा कि कोहला के चक 14 एसएसडब्ल्यू में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र शहरी सीमा के भीतर आता है, जबकि पूर्व में जनहित याचिका में सुझाव दिया गया था कि औद्योगिक क्षेत्रों को शहर से बाहर स्थापित किया जाए। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा इस क्षेत्र में औद्योगिक विकास किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण और आसपास की आबादी पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। बहादुर सिंह चौहान ने बताया कि 22 नवंबर 2024 को रेफरेंस कोर्ट ने किसानों के पक्ष में निर्णय देते हुए मुआवजा बढ़ाकर 8 लाख 7 हजार रुपए प्रति बीघा करने का आदेश दिया था, लेकिन इसके खिलाफ रीको द्वारा हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी गई। उन्होंने कहा कि एक ओर अधिकारी किसानों के हित की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर न्यायालय में उनके खिलाफ पैरवी कर रहे हैं, जो दोहरी नीति को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि 9 जनवरी 2015 को भूमि अवाप्ति अधिकारी द्वारा जारी पत्र में भी इस जमीन के भाव 50 से 70 लाख रुपए प्रति बीघा तक बताए गए थे, इसके बावजूद किसानों को बहुत कम मुआवजा दिया गया। हाल ही में ग्राम पंचायत कोहला में रीको व जिला प्रशासन द्वारा आयोजित कैंप में किसानों को 25 प्रतिशत विकसित भूमि देने का विकल्प दिया गया, लेकिन किसान इसे पर्याप्त नहीं मानते। उनका कहना है कि पहले उचित मुआवजा तय किया जाए, तभी किसी विकल्प पर विचार किया जाएगा। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया तो वे अपने अधिकारों और पुश्तैनी जमीन की रक्षा के लिए आंदोलन को और तेज करेंगे। इस दौरान महेंद्र बिजारणिया, रामप्रताप सोनी, हरमीत सिंह, महेंद्र कासनिया, रणजीत सिंह, ओम सुथार, सुखदेव सिंह, सतपाल सिंह, जनटासिंह, जसप्रीत सिंह और धर्मेंद्र सिंह सहित कई प्रभावित किसान मौजूद रहे।
